दो साल पहले दून की छात्रा भुवन्या ने आल इंडिया टॉप कर राष्ट्रीय फलक पर एजूकेशन हब माने जाने वाले देहरादून को जो मुकाम दिलाया था, उसे दोबारा पाना लगातार दूसरे साल भी ख्वाब ही रह गया।
इस बार भी 2013 में 12वीं की टॉपर रहीं भुवन्या विजय की तरह दून की गुरसिमरन ने 12वीं में 99 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं, पर उन्हें देश की मेरिट में जगह नहीं मिल पाई है।
वहीं, एजूकेशन हब की शॉन माने जाने वाले द दून स्कूल, वेल्हम गर्ल्स स्कूल, सेंट जोजेफ्स एकेडमी, ब्राइटलैंड, ऐन मैरी जैसे नामों को राष्ट्रीय फलक पर इन नतीजों से अलग पहचान नहीं मिल पाई। स्थिति यह है कि देश के टॉप 20 में दून के किसी भी स्कूल का कोई छात्र नहीं है।
वर्ष 2013 में पहली बार उस वक्त एजूकेशन हब (दून) को नई पहचान मिली थी, जब सेंट जोजेफ्स एकेडमी की छात्रा भुवन्या विजय ने 12वीं में 99 प्रतिशत अंक लाकर आल इंडिया टॉप किया था।
पढ़िए, विशेषज्ञ क्या मान रहे हैं वजह?
बीते वर्ष कोई भी स्कूल यह उपलब्धि हासिल नहीं कर पाया था। इस साल भी किसी स्कूल को राष्ट्रीय फलक पर अलग पहचान नहीं मिल पाई। हालांकि, ब्राइटलैंड स्कूल की छात्रा गुरसिमरन ने 99 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं, लेकिन इस बार देशभर में इससे ऊपर अंकों वाले छात्र मेरिट में शामिल हैं।
वहीं, विश्व प्रसिद्ध दून स्कूल में इस साल 10वीं में सर्वाधिक अंक प्रतिशत 97.2 और 12वीं में सर्वाधिक अंक प्रतिशत 97.5 रहा है। वेल्हम गर्ल्स स्कूल में 10वीं में सर्वाधिक अंक 96.60 जबकि 12वीं में सर्वाधिक अंक 97.75 फीसदी रहे।
सेंट जोजेफ्स एकेडमी, ऐन मैरी, समरवैली और ब्राइटलैंड जैसे स्कूलों ने रिजल्ट में प्रदेश में तो नाम कमाया, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह भी पहचान बनाने में नाकाम साबित हुए। हालांकि, विशेषज्ञ इसके पीछे मुख्य वजह राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कठिन होने को मान रहे हैं।