देहरादून में कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में अब तक 15 नकलची धरे जा चुके हैं। एक साल के भीतर सामने आए मामले इशारा करते हैं कि एजूकेशन हब देहरादून नकल का बड़ा ठिकाना बनता जा रहा है।
लेकिन सभी मामलों में पुलिस नकलचियों पर मुकदमे दर्ज करने से आगे नहीं बढ़ सकी है। एक साल बाद भी पुलिस नकल गिरोह के सरगना के गिरेबां तक नहीं पहुंच सकी है।
16 नवंबर को एसएससी की कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल रि-एग्जाम में दून के परीक्षा केंद्रों से छह नकलची पकड़े गए। इनमें शिवालिक पब्लिक स्कूल में तीन, डीबीएस पीजी कॉलेज में एक और एसजीआरआर बिंदाल में दो नकलची पकड़े गए।
डीबीएस कॉलेज में पकड़े गए सचिन कुमार निवासी बागपत के खिलाफ डालनवाला थाने में मुकदमा दर्ज है।
29 सितंबर 2013 को दून में एसएससी की परीक्षा के दौरान छह हाईटेक नकलची पकड़े गए थे। इनसे कपड़ों के भीतर सिले गए मोबाइल फोन और कानों में ब्लूटूथ डिवाइस मिली थी।
सभी दून में ही मौजूद युवक से फोन पर संपर्क में थे, जो सवालों के जवाब बता रहा था। पुलिस ने सभी छह युवकों और नकल करा रहे युवक को पकड़ लिया था।
यूपी और हरियाणा से चल रहे गिरोह
एसएससी परीक्षाओं में नकल कराने वाले गिरोह पूर्वी-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा से संचालित हो रहे हैं। पकड़े गए नकलचियों का रिकार्ड देखने पर मालूम होता है कि पकड़े गए युवकों में अधिकतर यूपी के मुजफ्फरनगर, बागपत और मेरठ के हैं। हरियाणा के नकलचियों की भी बड़ी संख्या है।
एक से डेढ़ लाख रुपए में होता है सौदा
पकड़े गए नकलचियों से पूछताछ में पता चला है कि नकल कराने वाले गिरोह मोटी राशि की वसूली कर रहे हैं। हर अभ्यर्थी से एग्जाम में पास कराने के एवज में एक से डेढ़ लाख रुपए लिए जाते हैं।
हर दो सप्ताह में एक परीक्षा
एजूकेशन हब के तौर पर जाना जाने वाला देहरादून परीक्षा आयोजन के लिए कर्मचारी चयन आयोग और अन्य प्रतियोगी परीक्षा आयोजकों की पसंद रहा है। एसएससी की परीक्षाओं में तो देहरादून में बनाए गए केंद्रों पर उत्तराखंड के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा तक से अभ्यर्थी पहुंचते हैं।
वहीं, एनडीए, सीडीएस, कैट आदि परीक्षाओं के लिए भी उत्तराखंड में देहरादून को अधिक तवज्जो दी जाती है। ऐसे में राजधानी में हर दो सप्ताह में कोई बड़ी प्रतियोगी परीक्षा आयोजित होती है।
चेकिंग में होती है लापरवाही
आयोग हर परीक्षा केंद्र को प्रति अभ्यर्थी के हिसाब से पैसा देता है। कालेज में जेनरेटर से लेकर सुरक्षाकर्मी तक का खर्च भी आयोग उठाता है। नकल रोकने के लिए आयोजकों का एक सचल दस्ता भी होता है।
लेकिन परीक्षा केंद्रों पर कई बार चेकिंग में लापरवाही बरती जाती है। यही वजह है कि नकलची मोबाइल फोन छिपाकर भीतर ले जाने में कामयाब रहते हैं।
पांच साल के लिए लग सकता है प्रतिबंध
कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में नकल के नियम सख्त हैं। परीक्षा के दौरान मोबाइल लाना ही प्रतिबंधित है। आयोग ऐसे किसी मामले में अभ्यर्थी का आवेदन तत्काल निरस्त कर सकता है।
मोबाइल से नकल करते पाए जाने पर अभ्यर्थी पांच साल के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है। यानी पांच वर्षों तक आयोग की किसी भी परीक्षा में वह नहीं बैठ सकता।
यह हैं पुराने मामले
- दो नवंबर 2014 को एसएससी की हायर सेकेंडरी लेवल परीक्षा में देहरादून और हल्द्वानी में चार नकलची पकड़े गए।
- नौ नवंबर 2014 को एसएससी की हायर सेकेंडरी लेवल परीक्षा में देहरादून, हल्द्वानी और अल्मोड़ा में 21 अभ्यर्थी नकल करते हुए पकड़े गए।
नकल के मामलों में पुलिस गिरोह की तह तक जाने की कोशिश करती है। कई बार इसमें वक्त लग जाता है, क्योंकि गैंग के तार दूसरे जिलों और प्रदेशों से जुड़े होते हैं। पुलिस गंभीरता से काम कर रही है, पहले कुछ गिरोहों का पर्दाफाश भी किया गया है।
- अजय सिंह, एसपी सिटी