अब आपके बच्चे के रिजल्ट कार्ड पर गुड, वेरी गुड या पुअर के बजाय मुस्कुराती या शुभकामना देती हुई स्माइली नजर आए तो चौंकिएगा नहीं।
स्कूलों को नई गाइडलाइंस जारी
सीबीएसई ने पांचवीं क्लास तक के बच्चों के लिए स्कूलों को नई गाइडलाइंस जारी की हैं। बोर्ड का मानना है कि रिमार्क के इस नए तरीके से बच्चों पर रिजल्ट का मनोवैज्ञानिक दबाव दूर होगा। कक्षा छह से दसवीं तक ग्रेडिंग पैटर्न लागू कर सीबीएसई ने छात्रों का मनोवैज्ञानिक दबाव करने का प्रयास किया है।
इससे छात्रों को रिजल्ट और डिवीजन के प्रेशर से काफी हद तक मुक्ति मिली। इसी तर्ज पर बोर्ड ने अब पांचवीं तक के बच्चों के लिए भी प्रावधान किए हैं। अब तक बच्चों के रिजल्ट पर स्कूल की ओर से वेरी गुड, गुड, पुअर और वेरी पुअर लिखा आता है, जिसका बच्चों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनता है।
इसे दूर करने के लिए बोर्ड ने सिर्फ दो स्माइली बनाई हैं। गुड और वेरी गुड के लिए एक और पुअर और वेरी पुअर के लिए शुभकामनाओं वाली स्माइली। बोर्ड का दावा है कि इससे जहां एक ओर बच्चों पर दबाव नहीं बनेगा, वहीं अच्छे रिजल्ट के लिए वे मोटिवेट हो सकेंगे।
बच्चों पर पड़ेगा पॉजीटिव असर
मनोवैज्ञानिक गुरलीन बिंद्रा का कहना है कि नन्हे बच्चों के मन पर रिमार्क का बहुत बड़ा असर पड़ता है। ऐसे में ही यही कोशिश होनी चाहिए कि बच्चे को निगेटिव रिमार्क न मिले। अब बोर्ड स्माइली कंसेप्ट लेकर आया है तो यह निश्चित तौर पर बेहतर साबित होगा।
बोर्ड का यह प्रयास बच्चों के लिए कारगर साबित होगा। इस गाइडलाइन को हम इसी सत्र से लागू करने जा रहे हैं।
- बीके सिंह, प्रिंसिपल, दिल्ली पब्लिक स्कूल
स्माइली मिलने पर बच्चों को रिजल्ट देखकर अच्छी फीलिंग्स आएंगी।
- दिनेश बड़थ्वाल, उप प्राचार्य, दून इंटरनेशनल स्कूल