फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बॉयोमेट्रिक मशीन: लगा तो लेंगे, संभालेंगे कैसे?

Fri, 23 Jan 2015 06:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश के महाविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों में हाजिरी मशीन लगाने के उच्च न्यायालय के आदेश का शिक्षकों ने भी स्वागत किया है, लेकिन यह भी सवाल उठने लगा है कि इन मशीनों का रखरखाव कैसे होगा।
विज्ञापन


दरअसल, प्रदेश के 2592 माध्यमिक विद्यालयों में बिजली संयोजन ही नहीं है। वहां मशीन चलाने की वैकल्पिक व्यवस्था हो भी जाए तो कितनी कारगर होगी, यह चुनौती बन गई है।

आंकड़ों पर नजर
विद्यालय-संख्या
सरकारी हाईस्कूल-1033
सरकारी इंटर कॉलेज-1238
सहायता प्राप्त हाईस्कूल-44
सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज-277

पढ़िए, क्या बोले जिम्मेदार
माध्यमिक विद्यालयों में हाजिरी मशीन लगनी चाहिए। इससे देरी से स्कूल आने वालों पर लगाम कसी जा सकेगी। शिक्षक विद्यालय से बिना सूचना दिए गायब नहीं होंगे। दूसरी ओर, शिक्षकों को गैरहाजिर रहने के आरोपों को खत्म करने का भी मौका मिलेगा। लेकिन, यह काम आसान नहीं है। विषम भौगोलिक हालात वाले स्कूलों में विशेष व्यवस्था करनी होगी।
विज्ञापन

-अजय राजपूत, प्रदेश प्रवक्ता, राजकीय शिक्षक संघ

प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में मशीनें लगाने का आदेश उच्च न्यायालय ने दिया है। योजना बन रही है। अभी किसी विद्यालय में यह मशीन नहीं लगी है। लेकिन मेरा मानना है कि पहले चरण में विभाग के सभी कार्यालयों में यह मशीन लगनी चाहिए। सुधार ऊपर के स्तर से शुरू हो तो शिक्षक भी जागरूक होंगे।
-जितेंद्र सक्सेना, उप शिक्षा निदेशक (माध्यमिक)

प्रदेश के दूरदराज के कई विद्यालयों में बिजली नहीं है। उच्च न्यायालय का आदेश आया है तो इसका अध्ययन किया जा रहा है। परीक्षण के बाद ही कोई निर्णय किया जाएगा। यह बात सही है कि मशीनों को लगाने के बाद इनकी देखरेख करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी।
विज्ञापन

-एमसी जोशी, शिक्षा सचिव
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें