राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद(एनसीटीई) की नई नियमावली आने के बाद अब सभी बीएड कालेजों को नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ेगी।
एक ओर जहां एनसीटीई ने सभी 100 बीएड सीटों वाले कालेजों को 50 सीटें रखने का फैसला किया है तो दूसरी ओर इन सीटों पर एडमिशन से पहले कालेजों को एक शपथ पत्र भी देना होगा। अगर कोई कालेज 100 सीटें चलाना चाहता है तो उसे अलग से परमीशन लेनी होगी।
एनसीटीई नियमावली 2014 के तहत नए सत्र 2015-16 से बीएड पाठ्यक्रम की अवधि दो वर्ष कर दी गई है। नियमावली में दिए गए प्रावधानों के मुताबिक जिन बीएड कालेजों में अब तक 100 बीएड सीटें थी, वह 50 मानी जाएंगी। कालेजों को यह छूट दी गई है कि वह 100 सीटों पर ही एडमिशन ले सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना होगा।
इस संबंध में उन्हें तुरंत एनसीटीई के पास एक शपथ पत्र देना होगा, जिसके तहत 31 अक्तूबर 2015 तक उन्हें इस बात का प्रमाण देना होगा कि वह नई नियमावली के तहत मानक पूरे कर चुके हैं।
इसके तहत उन्हें एनसीटीई की बैठक में मिली मान्यता की कॉपी, संबंधित कालेज को विवि से संबद्धता की प्रतिलिपी, एफडीआर के प्रमाण, नियमावली की मांग के तहत जरूरी शिक्षकों की सूची(विवि से प्रमाणित), इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के बाद उसके नक्शे आदि का प्रमाण 31 अक्तूबर से पहले भेजना होगा।
अहम बात यह भी है कि इस मामले में कभी भी एनसीटीई की टीम की ओर से कालेजों का इंस्पेक्शन किया जा सकता है। ऐसे में बीएड चलाना अब आसान नहीं रहा।
एनसीटीई ने नई नियमावली के तहत मानक काफी सख्त कर दिए हैं। इसके तहत नए कालेजों को मान्यता लेना तो मुश्किल हो ही गया है, पहले से चल रहे कालेजों को भी नए सिरे से शपथ पत्र देकर इंफ्रास्ट्रक्चर जुटाना पड़ेगा। हमने इस संबंध में सभी जुड़े हुए कालेजों को अवगत करा दिया है।
- सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, एसोसिएशन आफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट