एलयू में माइग्रेशन व प्रोविजनल सर्टिफिकेट बनाने के नाम पर 15.53 लाख रुपये का चूना लगाया गया है। परीक्षा विभाग और कैशियर ऑफिस के आंकड़ों के मिलान में यह खामी पकड़ी गई।
स्थानीय निधि लेखा एवं परीक्षा विभाग की ऑडिट रिपोर्ट में यह आपत्ति लगाई गई है। ऑडिट में परीक्षा विभाग में हुई यह गड़बड़ी उजागर हुई। इसमें जितना धन एलयू के कोष में जमा होना चाहिए था।
उससे करीब 15.53 लाख रुपये कम हैं। अब रिपोर्ट आने के बाद एलयू में खलबली मची हुई है। यूनिवर्सिटी प्रशासन को इस रिपोर्ट से अवगत करवा दिया गया है। फिलहाल, अब आगे कार्रवाई एलयू प्रशासन को करनी है।
स्थानीय निधि लेखा एवं परीक्षा विभाग की ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2009-10 में किया गया खेल उजागर कर रही है। रिपोर्ट में लिखा है कि वर्ष 2009-10 विभिन्न कोर्सेज के क्रमांक 1051 से लेकर 15675 तक माइग्रेशन सर्टिफिकेट बनाए गए।
इस तरह कुल 14,600 माइग्रेशन सर्टिफिकेट जारी किए गए। उस समय माइग्रेशन बनवाने का शुल्क 300 रुपये था, इसके अनुसार यूनिवर्सिटी के खाते में कुल 43,80,000 रुपये जमा होने चाहिए।
लेकिन 33,53,800 रुपये ही जमा हुए। इसमें 10,26,200 रुपये का बीच में गोलमाल किया गया। इसी तरह क्रमांक एक से 2450 और 8301 से लेकर 10000 क्रमांक तक प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किए गए।
कुल 4,150 सार्टिफिकेट जारी हुए। 300 रुपये शुल्क के हिसाब से कुल 12,45,000 रुपये जमा किए जाने चाहिए थे लेकिन 8,10,300 रुपये ही एलयू के खाते में जमा हुए। ऐसे में 4,34,700 रुपये की हानि हुई।
वर्ष 2009-10 की ऑडिट रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। वहीं, वर्ष 2007-08 की रिपोर्ट में जो एक बिंदु छूट गया था, उसे भी शामिल किया गया है।
इसमें बैक पेपर परीक्षा में शामिल 463 स्टूडेंट्स के रिजल्ट अपलोड करने के नाम पर एक निजी कंपनी को 92,600 रुपये दिए गए। आखिर एलयू ने अपने पास पूरा सेटअप होते हुए भी बाहरी एजेंसी से क्यों काम करवाया।
फिलहाल, परीक्षा विभाग ने करीब 15,53,500 रुपये का एलयू को चूना लगाया।