अनुमन्य सीटों और मेरिट के आधार पर एडमिशन लागू होने के बाद उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों की दाखिले की राह मुश्किल होती जा रही है।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पिछले सप्ताह उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों को बीए, बीएससी और बीकॉम प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए दस प्रतिशत वेटेज देने की घोषणा तो कर डाली, लेकिन उच्च शिक्षा निदेशालय अब तक ऐसी व्यवस्था शुरू करने का प्रावधान नहीं तलाश सका है।
खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों में अपने बोर्ड के छात्रों को वेटेज देने की व्यवस्था काफी पहले खत्म हो चुकी है। अब तक की जांच में यह साफ हो चुका है कि प्रदेश में वेटेज का कोई शासनादेश आज तक जारी नहीं हुआ है। ऐसे में प्रदेश में यह व्यवस्था किस तरह और किन नियमों के आधार पर लागू होगी, उच्च शिक्षा निदेशालय इन सवालों में उलझकर रह गया है।
यूपी में मिलता था पांच फीसदी वेटेज
अविभाजित यूपी में स्टेट बोर्ड के छात्रों को कालेजों में दाखिले में पांच प्रतिशत वेटेज दिया जाता था। लेकिन उत्तराखंड के गठन के बाद यह व्यवस्था खत्म होती गई।
उच्च शिक्षा निदेशालय सूत्रों के अनुसार प्रदेश स्तर पर कोई जीओ न होने के बावजूद गढ़वाल विवि अपने स्तर पर ही यह वेटेज देता था। लेकिन राज्य विवि होने के बावजूद गढ़वाल विवि उत्तराखंड बनने के बाद यह व्यवस्था लागू नहीं रख सका।
यह है वेटेज
दरअसल उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों की औसत प्रतिशतता, सीबीएसई व आईएससी की तुलना में काफी कम होती है। यूके बोर्ड में छात्रों के औसत अंक 55 प्रतिशत तक होते हैं जबकि बाकी बोर्डों में यह 75 प्रतिशत हैं।
अनुमन्य सीटों पर मेरिट से दाखिले करने की सूरत में सीबीएसई और आईएससी बोर्ड के छात्रों का चयन प्रतिशत यूके बोर्ड की तुलना में कई गुना अधिक है। ऐसे में छात्रों की मांग है कि यूके बोर्ड के छात्रों को दस प्रतिशत का वेटेज दिया जाए। यानी 55 प्रतिशत वाले छात्र को मेरिट में 65 प्रतिशत काउंट किया जाए।
हर साल निकलते हैं दो लाख छात्र
उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा एवं परीक्षा परिषद (यूके बोर्ड) से संबद्ध प्रदेश के इंटर कालेजों से हर साल डेढ़ से दो लाख छात्र निकलते हैं। वर्ष 2014 में ही एक लाख 38 हजार छात्रों ने बोर्ड की इंटर की परीक्षा दी थी।
पर्वतीय राज्य होने के कारण प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में सरकारी इंटर कालेज ही माध्यमिक शिक्षा का जरिया हैं। ऐसे में वेटेज न मिल पाने की स्थिति में प्रदेश के लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक सकता है।
हम वेटेज का फार्मूला तलाश रहे हैं। इसका आधार मजबूत होगा तभी छात्रों को लाभ देना संभव हो पाएगा। लेकिन अभी कहीं से भी ऐसा आधार नहीं मिल सका है।
-डा. एनपी माहेश्वरी, निदेशक, उच्च शिक्षा