एचआईएचटी (हिमालयन इंस्टीट्यूट) जौलीग्रांट की ओर से दो साल से लगातार 50 एमबीबीएस सीटों में से 25 सरकारी कोटे की यूपीएमटी काउंसिलिंग में दिए जाने के बाद इस साल सीटें नहीं मिल पाएंगी। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की ओर से मेडिकल कॉलेज को अतिरिक्त 50 सीटें इस साल अलॉट नहीं की गई हैं।
कॉलेज का कहना है कि उन्होंने दो बार निरीक्षण कराया है। वह जांच कर रहे हैं, अगर उनके स्तर की खामी न पाई गई तो वे कोर्ट जाने को तैयार हैं।
एमसीआई ने पाईं थीं खामियां
एचआईएचटी मेडिकल कॉलेज जौलीग्रांट में दो वर्ष पहले एमसीआई ने 50 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटों को मान्यता दी थी। कॉलेज की कुल 150 सीटों में से 25 सीटें यूपीएमटी काउंसिलिंग में दी जाने लगी।
इस बार भी कॉलेज में 50 अतिरिक्त सीटों की बढ़ोतरी जारी रखने के लिए एमसीआई की टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने खामियां पाईं और आवेदन रिजेक्ट कर दिया। इस पर कॉलेज ट्रस्ट की ओर से एमसीआई को पत्र भेजा गया और कहा गया कि जो खामियां बताई गईं हैं, वैसी कोई कमी नहीं है।
दोबारा निरीक्षण के बाद भी आवेदन निरस्त
जनवरी 2015 में दोबारा निरीक्षण कराने की मांग की गई, जिसे मान लिया गया और निरीक्षण की नई तिथि 15 मई तय की गई। कॉलेज के चेयरमैन डॉ. विजय धस्माना का कहना है कि अंतिम तिथि बीतने के बाद 21 मई को एमसीआई की टीम निरीक्षण करने आई। टीम ने आवेदन फिर निरस्त कर दिया।
कॉलेज के चेयरमैन ने बताया कि वे जांच करवा रहे हैं कि किस वजह से यह सीट नहीं मिली है। कहा कि अगर एमसीआई के स्तर से यह खामी हुई होगी तो वे इसके खिलाफ कोर्ट जाने को तैयार हैं। यह भी साफ किया कि यूपीएमटी काउंसिलिंग में एमबीबीएस की 25 सीटें केवल उनकी 50 सीटें बढ़ने की सूरत में ही दी जाएंगी।
तीन नए कॉलेजों के प्रस्ताव रिजेक्ट
प्रदेश से तीन नए मेडिकल कॉलेजों के प्रस्ताव भी मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने रिजेक्ट कर दिए हैं। इसमें दून मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज और श्रीदेव सुमन सुभारती मेडिकल कॉलेज का प्रपोजल शामिल है।