स्टॉक एक्सचेंज में सटोरियों को दो श्रेणियों बुल एवं बीयर में बांटा जा सकता है। इन्हें तेजड़िया व मंदड़िया भी कहा जाता है।
बुल वह सटोरिया होता है जो किसी कंपनी के शेयरों के निकट भविष्य में भाव बढ़ने की उम्मीद के साथ उनको मौजूदा भाव पर खरीदता है, ताकि वह उन्हें आगे ऊंची कीमत पर बेचकर मुनाफा कमा सके।
बीयर यानी मंदड़िये वह सटोरिये होते हैं जो किसी कंपनी के शेयर, उनके निकट भविष्य में भाव गिरने की आशंका में बेचते हैं। मंदड़ियों की भूमिका भी शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में मुख्य होती है।
बाजार में जब बिना किसी आधार के तेजड़िया गतिविधियां बढ़ जाती हैं तो किसी न किसी घोटाले की आशंका भी बढ़ जाती है। हर्षद मेहता के समय में बाजार पूरी तरह से तेजड़ियों के कब्जे में था।