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ममता ब्रिगेड के हल्ला बोल में डिरेल हुई ‘पवन एक्सप्रेस’

Tue, 26 Feb 2013 07:20 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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17 साल बाद रेल बजट पेश कर रहे कांग्रेसी रेलमंत्री की ट्रेन को ममता बनर्जी की हल्ला बोल बिग्रेड ने पटरी से उतार दिया। सिर्फ तृणमूल कांग्रेस और एनडीए ही नहीं सरकार की सहयोगी सपा और आरजेडी ने भी रेल मंत्री पवन कुमार बंसल के बजट पर नाखुशी जाहिर की। इन्होंने वेल में आकर हंगामा भी किया। हालांकि शुरुआत में बंसल ने वाहवाही बटोरी, लेकिन जल्द ही वह सदस्यों के निशाने पर आ गए।
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खासतौर पर पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के ज्यादातर सदस्यों ने अपने-अपने राज्यों की उपेक्षा को लेकर नारे भी लगाए। लोकसभा में हुए इस भारी हंगामे के दौरान बंसल पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्रों को ज्यादा तवज्जो देने पर ताने भी कसे गए।

लोकसभा में प्रश्नकाल के तुरंत बाद रेल बजट शुरू हुआ। बंसल समय से पहले ही सदन में आ चुके थे। वह संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ और कृषि मंत्री शरद पवार के बीच में बैठे थे। भाषण शुरू करने पर जब आवाज कम आई तो इन दोनों मंत्रियों ने माइक बंसल के निकट कर दिया।
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शुरू में तो सब ठीकठाक चला, बंसल जब भी नई घोषणाएं करते, सदस्य मेज थपथपाकर उनकी हौसला आफजाई भी करते रहे। मगर जब मालभाड़े में इजाफा समेत कई कड़वी घोषणाएं होने लगी तो सदन का माहौल बदलने लगा। इसके बाद जब रेलमंत्री ने रायबरेली क्षेत्र के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया तो बाकी सदस्यों को अपने-अपने क्षेत्र की उपेक्षा अखरने लगी। फिर तो टोका-टोकी शुरू हो गई।

अचानक ही ममता की हल्ला ब्रिगेड के कल्याण बनर्जी अन्य सदस्यों के साथ शोर मचाते हुए वेल में घुस आए। भाजपा के सदस्य भी पहले से खड़े थे। फिर तो सपा, जदयू, आरजेडी, समेत विभिन्न दलों के सदस्य भी वेल में घुस कर हंगामा और नारेबाजी करने लगे।

हालांकि बंसल हंगामा होने पर भी अपना भाषण पढ़ते रहे। उनके साथ पहली पंक्ति पर बैठी सोनिया गांधी के चेहरे पर भी तनाव साफ तौर पर देखा जा सकता था। अनदेखी के आरोपों पर सांसदों ने हंगामा इतना बरपाया कि आखिरकार बंसल को अपना पहले रेल बजट भाषण के आखिरी हिस्से का जैसे तैसे पढ़ने की खानापूर्ति करनी पड़ी

राजीव गांधी को किया याद
ग्रे कलर के बंद कॉलर का सूट पहने बंसल आत्मविश्वास से लबरेज लग रहे थे। लगभग सवा घंटे का बजट भाषण बंसल ने अंग्रेजी में ही दिया। अलबत्ता तीन शेर हिंदी में जरूर पढ़े। अपने भाषण के दौरान वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को याद करना नहीं भूले।

शाबासी और हूटिंग की गवाह बनी धर्मपत्नी
बंसल का बजट भाषण जिस शांत तरीके से शुरू हुआ, उसका समापन उतने ही हंगामे के बीच हुआ। भाषण पर बंसल को मिली शाबासी और हूटिंग की गवाह उनकी धर्मपत्नी भी बनी, जो स्पीकर की दीर्घा में परिजनों के साथ मौजूद थीं।
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