गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को सरकार आगामी बजट में प्रोविजनिंग पर लगने वाले आयकर पर राहत दे सकती है। इसके तहत एनबीएफसी को भी बैंकों के समान आयकर में 7.5 फीसदी तक छूट मिल सकती है। अभी एसेट फाइनेंस कंपनियों को प्रोविजनिंग करने पर आयकर में किसी तरह की छूट नहीं मिलती है।
बजट में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को बैंकों के समान आयकर नियमों के तहत लाया जा सकता है।
यानी, एनबीएफसी को एनपीए पर की जानी वाली प्रोविजनिंग पर आयकर देने में 7.5 फीसदी की छूट दी जा सकती है। इसके पहले एनबीएफसी पर आरबीआई द्वारा जारी ड्रॉफ्ट रिपोर्ट में भी इस बात की सिफारिश की जा चुकी है कि बैंकों पर लागू होने वाले कर ढांचे को ही एनबीएफसी पर लागू किया जाए।
आरबीआई ने ऐसा इस आधार पर कहा है कि अब वह एनपीए संबंधी नियमों को भी बैंकों के समान लाने की तैयारी कर रहा है। इसे देखते हुए यह सहमति बनी है कि जब एनपीए तय होने के नियम बैंकों के समान होंगे, तो उसके लिए प्रोविजनिंग किए जाने पर लागू होने वाले आयकर नियम भी बैंकों के समान किए जाए।
क्या है प्रोविजनिंग
ऐसे कर्ज जिनकी वसूली वित्तीय संस्थान नहीं कर पाते हैं, गैर निष्पादक संपत्तियां (एनपीए) कहलाती हैं। ऐसे में बैंकों और एनबीएफसी के कारोबार पर जोखिम बढ़ता है, जिसका असर उनके लाभ आदि पर प्रतिकूल होता है। इसे देखते हुए वित्तीय संस्थानों को एनपीए हो चुके कर्ज के लिए एक निश्चित राशि अलग रखनी होती है, जिसका इस्तेमाल वह कारोबार के लिए नहीं कर सकते हैं। यह राशि प्रोविजनिंग कहलाती है।