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चुनाव फंडिंग में पारदर्शिता लाएं पार्टियां: एसोचैम

Thu, 14 Feb 2013 10:04 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
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चुनाव में बेहिसाब खर्च होने वाले करोड़ों रुपये का लेखा जोखा सार्वजनिक करना भले ही राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को पसंद नहीं हो, लेकिन कॉरपोरेट जगत इसके पक्ष में है। उद्योग संगठन एसोचैम का कहना है कि चुनाव फंडिंग पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।
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इसका पूरा ब्योरा आम जन को मालूम होना चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया को लेकर किसी तरह के संदेह की गुंजाइश नहीं हो। सरकार को सभी दलों और उम्मीदवारों के लिए एक विशेष फंड का सृजन करना चाहिए। संगठन ने लोक सभा और विधानसभा चुनावों में खर्च की अधिकतम सीमा का हटाने की मांग भी की है।

संगठन ने अपनी सिफारिश पेश करते हुए कहा है कि प्रत्येक राजानीतिक दल और उम्मीदवारों का चुनाव कोष से संबंधित एक बैंक खाता होना चाहिए। इसी खाते से सभी खर्च होने के साथ उन्हें चंदा भी मिल सके। खाते का ब्योरा सार्वजनिक करने की सलाह भी दी गई है।
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यह भी कहा गया है कि अगर उम्मीदवारों के चुनाव खर्च के लिए बनाए गए खाते में कुछ रकम चुनाव खत्म होने के बाद बच जाती है, तो उसे सरकार के जरिए बनाए गए सार्वजनिक चुनाव फंड में डालने का विकल्प तैयार होना चाहिए। इस फंड का इस्तेमाल आगामी चुनाव पर खर्च होना चाहिए। यह भी कहा गया है कि राज्य सरकारों को भी केंद्र की तरह विशेष चुनाव फंड को तैयार करना चाहिए। इस कोष का इस्तेमाल विधानसभा चुनाव में करने की सलाह दी गई है।
 
एसोचैम का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में कालाधन के इस्तेमाल से मौजूदा कामकाज की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। इसलिए सरकार को इस ओर पारदर्शिता लाने के लिए गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है। उद्योग जगत की राय में चुनाव में योग्य, लेकिन सामान्य उम्मीदवारों का चयन होना चाहिए। संगठन का मानना है कि उम्मीदवारों की ओर से होने वाले खर्च का चुनाव आयोग की ओर से बारीकी से ऑडिट होना भी जरूरी है।

एसोचैम ने तमाम अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा है कि लोकसभा चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार की ओर से 40 लाख के सीलिंग का दोगुना खर्च किया जाता है। यह भी देखा जा रहा है कि धनवान उम्मीदवारों की चुनावी सफलता सामान्य व गरीब उम्मीदवारों की तुलना में कहीं अधिक है। संगठन का कहना है कि सरकार की ओर चुनाव में अधिकतम खर्च करने की सीमा तय करने के कारण ज्यादातर उम्मीदवार खर्च का वास्तविक ब्योरा नहीं देते हैं।
 
एसोचैम की मानें, तो वर्ष 2008-09 में राजनीतिक पार्टियों के चुनाव खर्च का ब्यौरा जो चुनाव आयोग के पास मौजूद है उसके मुताबिक कांग्रेस ने 497 करोड़ रुपये के आय और 275 करोड़ रुपये के  खर्च किया था। बीजेपी की ओर से 220 करोड़ रुपये की आय और 196 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

इसी तरह वर्ष 2009 से 2011 के बीच 1,396 पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों ने चंदा और अलग-अलग स्रोत से करीब 4,662 करोड़ रुपये एकत्रित किये, लेकिन इसमें से 85 फीसदी चंदा देने वालों के नाम को उजागर नहीं किया गया।
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