चीन की अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अवसर बन सकता है बशर्ते भारतीय उद्योगपति इसके लिए जोखिम उठाएं। यह मंत्र देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है जो कि उन्होंने मंगलवार को उद्योगपतियों के साथ करीब तीन घंटे तक चली बैठक के दौरान दिया।
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उनका कहना है कि इस समय सरकारी क्षेत्र की तरफ से तो काफी निवेश हो रहा है लेकिन उस हिसाब से निजी क्षेत्र की तरफ से निवेश नहीं हो रहा है। यदि निजी क्षेत्र भी जोखिम ले कर निवेश करना शुरू करें तो अर्थव्यवस्था की कायापलट होते देर नहीं लगेगी।
केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री ने उद्योगपतियों को कहा कि चीन में सुस्ती है तो यह भारतीय उद्योग जगत के लिए एक अवसर है।
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इससे भारतीय अर्थव्यवस्था केलिए निवेश करें और ऐसे उद्योग धंधों को बढ़ावा दें, जिससे अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिले। उनका कहना था कि लघु एवं मंझोले दर्जे के उद्योग -एसएमई- पर ज्यादा ध्यान देने से समाज में रोजगार के अवसर ज्यादा सृजित होंगे। प्रधानमंत्री का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के आधारभूत तत्व काफी मजबूत हैं, इसलिए यहां वैश्विक घटना का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है।
खेती-बारी पर अधिक ध्यान देने को कहा
प्रधानमंत्री आवास में नामी उद्योगपतियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक के दौरान मोदी ने कहा कि अभी खेती-बारी से जुड़े कार्यों पर ज्यादा ध्यान देने का वक्त है। भारतीय खेती मानसून के भरोसे होती है, इस तथ्य की ओर इशारा करते हुए उन्होंने खेती के लिए सिंचाई सुविधा विकसित करने पर जोर दिया।
इसके साथ ही उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर जब ज्यादा ध्यान दिया जाएगा तो इससे किसानों को फायदा होगा। जेटली के मुताबिक बैठक में निवेश की बात प्रमुखता से उठी।
बैठक में बताया गया कि सरकार की तरफ से तो खूब निवेश हो रहा है लेकिन निजी क्षेत्र की तरफ से उस तरह से निवेश नहीं हो रहा है। आक्रामक निवेश के बिना भारत इस अवसर का लाभ नहीं उठा सकता है।
प्रधानमंत्री की मंगलवार की बैठक में एक तरफ भारत सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाल रहे मंत्री उपस्थित थे तो दूसरी तरफ देश के नामचीन उद्योगपति और अग्रणी उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी आए थे।
इसमें मुख्य आर्थिक सलाहकार, वित्त सचिव, आर्थिक कार्य विभाग के सचिव, राजस्व सचिव और कुछ अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों के सचिव उपस्थित थे। इसके अलावा कुछ बैंकर, कुछ अर्थशास्त्री भी आए थे।
सेंसेक्स फिर 25 हजार के पार
चीन के बाजार में सुधार और ग्लोबल तेजी के रुख से उत्साहित घरेलू शेयर बाजार ने मंगलवार को बढ़त का रुख किया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 424.06 अंक की मजबूती के साथ एक बार फिर से 25,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करता हुआ 25,317.87 अंक पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 129.45 अंक की बढ़त के साथ 7,688.25 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान इसने 7,700 अंक के स्तर को भी पार किया।
चीन, जापान और हांगकांग जैसे एशिया के प्रमुख बाजारों में तेजी की खबर ने बीते दो दिनों में 871 अंकों की गिरावट झेलने वाले घरेलू शेयर बाजार का हौसला बुलंद कर दिया। चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 2.92 फीसदी, हांगकांग के हेंगसेंग 3.28 और जापान का निक्की 2.43 फीसदी की बढ़त पर रहा।
इसके अलावा करीब दो साल के निचले स्तर पर जा पहुंचे रुपये के भी सुधर कर 66.55 रुपये प्रति डॉलर के भाव पर आने से भी बाजार को काफी सहारा मिला। तेजी के इस माहौल में घरेलू बाजार में निवेशकों ने अच्छी खरीदारी की। खासकर वित्तीय क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में अच्छी लिवाली देखने को मिली।
कैपिटल गुड्स, मेटल और रीयल्टी जैसे समूहों में भी मजबूती का रुख रहा। सेंसेक्स में सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में गेल, टाटा स्टील, भेल, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, वेदांता, एलएंडटी, महिंद्रा, एसबीआई और टाटा मोटर्स शामिल रहे।
'भारतीय अर्थव्यवस्था का ढांचा मजबूत, नहीं पड़ेगा असर'
केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का ढांचा मजबूत है और इस पर सुस्ती का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। प्रधानमंत्री आवास पर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में जेटली ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था का ढांचा मजबूत है।
इसलिए इस पर वैश्विक सुस्ती या चीन की मुद्रा कमजोर होने का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास पर उद्योगपतियों की बैठक के दौरान भी
इस पर काफी चर्चा हुई और उसमें यही तथ्य निकल कर आया कि दूसरे देशों में चल रहे उठा पटक का भारत पर थोड़ा प्रभाव तो पड़ेगा लेकिन वैसा कुछ नहीं होगा, जिसके बारे में अंदेशा जताया जा रहा है।जेटली का कहना है कि अभी समय की मांग है लोगों को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
तभी तो प्रधानमंत्री ने भी उद्योगपतियों से खेती-बारी की स्थिति बेहतर करने के लिए उस क्षेत्र में निवेश करने को कहा है। साथ ही कहा है कि लघु उद्योग को ज्यादा बढ़ावा दिया जाए ताकि उसमें अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके।