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तो अमीर लोगों से ये चाहती है मोदी सरकार

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नरेंद्र मोदी सरकार चाहती है कि धनी लोग सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर लेना छोड़ दें। इस सिलसिले में सरकार एक ऐसा अभियान शुरू कर सकती है, जिसके तहत धनी लोग खुद-ब-खुद अपने सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों को सौंप दें।
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लेकिन सरकार को इसकी पहल संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ अफसरों से अपील करके करनी चाहिए। ये लोग इस मामले में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के उन 100 कर्मचारियों के नक्शे-कदम पर चल सकते हैं जिन्होंने सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर सरेंडर कर दिए हैं।

सरकार को इस कड़वी हकीकत का इल्म है कि रसोई गैस और केरोसिन के मद में दी जाने वाली भारी-भरकम सब्सिडी बेकाबू होती जा रही है और यह इसके वित्तीय संतुलन के लिए भारी खतरा है। यही वजह है कि मोदी सरकार केरोसिन और रसोई गैस सिलेंडर सब्सिडी का लाभ सिर्फ इसके वास्तविक हकदारों को पहुंचाने के विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही है।
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कैसे मिलेगा वास्तवकि लोगों को हक?

दरअसल पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय जल्द ही एक अभियान शुरू करने जा रहा है ताकि अमीरों और पैसे वालों को अपने सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों को सरेंडर करने के लिए मनाया जा सके। इस तरह वह इस पैसे को गरीबों के लिए इस्तेमाल कर सकेगी और यह राष्ट्र निर्माण में पैसे वालों का अहम योगदान होगा। इस संबंध में एक वेबसाइट या पोर्टल लांच करने की योजना बन रही है।

इसका नाम होगा माईएलपीजी.इन। इसके जरिये ग्राहक बिना ज्यादा कागजी कार्यवाही के अपने सिलेंडर डिस्ट्रीब्यूटर या तेल विपणन कंपनियों को सौंप सकेंगे। इससे देश में अमीरों और पैसे वालों के प्रति देश भर में एक सकारात्मक भावना पैदा होगी। इसमें मध्य वर्ग के लोग भी शामिल होंगे, जो सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों को जमा कर गर्व से यह कह सकेंगे कि वे देश निर्माण के लिए अपने हितों के बलिदान के लिए तैयार हैं।

उनका पैसा गरीबों की भलाई में काम आ सकता है। सरकार इस फॉम्यूले पर भी काम कर रही है कि अगर उसका यह अभियान सफल हुआ तो वह सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडरों को सरेंडर करने के दिन ही उपभोक्ताओं को सब्सिडी रहित गैस कनेक्शन दे देगी और सिलेंडरों की डिलीवरी कर देगी।

ऑयल कंपनियों के कर्मचारियों ने वापस किए सिलेंडर

वर्ष 2011 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से जुड़ी संसद की स्थायी समिति ने यह सुझाव दिया था कि छह लाख रुपये से ज्यादा वार्षिक आय वाले लोगों को सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर देने बंद किए जाएं। इस तरह से सब्सिडी का लाभ इसके वास्तविक हकदारों तक ज्यादा अच्छी तरह से पहुंचाया जाएगा।

शुक्रवार को इस मकसद को लेकर इंडियन ऑयल क़ॉरपोरेशन के 100 कर्मचारियों ने अपने सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर सौंप दिए। उनके साथ भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एस. वरदराजन ने भी अपने सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर सौंप दिए। उन्होंने अपने कर्मचारियों से भी सिलेंडर सरेंडर कर उदाहरण पेश करने की अपील की है।
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नेता जी लोग कब करेंगे ऐसा?

जब, संसद की स्थायी समिति ने छह लाख रुपये से ऊपर की वार्षिक आय वाले लोगों को सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर न देने की सिफारिश की थी, तो इनमें संवैधानिक पदों पर बैठे लोग, सांसद, विधायक और सरकार के आला अफसर भी शामिल थे।

लेकिन यूपीए सरकार ने इस सिफारिश को ठंडे बस्ते में डालना ही उचित समझा। बाजार कीमत से कम पर रसोई गैस बेच कर सब्सिडी के बन रहे पहाड़ को घटाने के लिए यह सिफारिश की गई थी।

समिति ने यह भी कहा था कि तेल मंत्रालय गरीबी से रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को मुफ्त सिलेंडर देने की योजना को जल्दी मंजूरी दिलाने की कोशिश शुरू कर दे। यह योजना पांच साल तक चलनी चाहिए जब तक कि पात्र बीपीएल परिवार इसके तहत पूरी तरह कवर न हो जाएं।

मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक सरकारी तेल विपणन कंपनियों की अंडर रिकवरी 1,07,850 करोड़ रुपये तक पहुंच जाने की संभावना है। इस समय सरकारी तेल विपणन कंपनियों को सब्सिडी रेट पर एक  रसोई गैस सिलेंडर बेचने पर 449.07 रुपये का घाटा हो रहा है। इसी तरह केरोसिन पर उसे प्रति लीटर 33.7 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 3.40 रुपये का घाटा हो रहा है।
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