सरकार ने सोने और चांदी के गहनों पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है।
सरकार का कहना है कि सोने-चांदी के गहने बनाने वाले घरेलू कारीगरों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है। सरकार ने मंगलवार को इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी।
हालांकि, सरकार की इस पहल को चालू खाता घाटे को काबू करने की एक नई कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
सरकार का कहना है कि सोने-चांदी और इनके गहनों के बीच आयात शुल्क में कोई अंतर नहीं होने से सस्ते आयातित गहने से घरेलू सुनार प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे थे।
अधिकतर आयातित गहने मशीन के बने होते हैं, जिनका मुकाबला घरेलू बाजार में हाथ से बने गहनों से मुश्किल हो रहा था। ऐसे में लाखों कारीगरों के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया था।
इसलिए लाखों कारीगरों के हितों को ध्यान में रखते हुए सोने और चांदी के गहनों पर आयात शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है।
बढ़ते चालू खाता घाटे पर नियंत्रित करने की कोशिशों के तहत सरकार ने पिछले दो सालों के भीतर सोने पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से दो फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया है।
सोने के अत्यधिक आयात से देश का आयात बिल बढ़ता जा रहा था, इसे कम करने के लिए सरकार ने आयात शुल्क में बढ़ोतरी की।
इस साल अप्रैल से जुलाई चार माह के दौरान देश में 13.75 करोड़ डॉलर मूल्य के सोने के गहनों का आयात हुआ है।