वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने महंगाई में आई गिरावट को देखते हुए उम्मीद जताई है कि रिजर्व बैंक ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए अगली मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती करेगा।
रिजर्व बैंक 1 अप्रैल को अपनी अगली समीक्षा पेश करेगा। गत 28 जनवरी को पिछली मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट 7.75 फीसदी से बढ़ाकर 8.0 फीसदी कर दिया था।
आचार संहिता लागू होने से रिजर्व बैंक क्या बिना चुनाव आयोग से संपर्क किए नीतिगत पहल कर सकता है, इस सवाल के जवाब में आनंद शर्मा ने कहा कि रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त अधिकार है। सरकार को कामकाज जारी रखना है। हम आचार संहिता का सम्मान करते हैं लेकिन यह मूल संवैधानिक अधिकार का हिस्सा नहीं है।
गौरतलब है कि फरवरी में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 4.68 फीसदी पर रही, जो पिछली नौ महीनों में पहली बार पांच फीसदी से नीचे आई। आलू और प्याज की कीमतों में गिरावट महंगाई घटने की एक अहम वजह रही।
दूसरी ओर, खुदरा महंगाई फरवरी में 25 माह के निचले स्तर 8.1 फीसदी पर आ गई। उद्योग जगत आर्थिक विकास और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए ब्याज दरों में कटौती की मांग कर रहा है।
देश की आर्थिक विकास दर 2012-13 में घटकर दशक के निचले स्तर 4.5 फीसदी पर आ गई थी और चालू वित्तवर्ष में इसके 4.9 फीसदी पर रहने का अनुमान है।
ब्याज दरें स्थिर रख सकते हैं राजन:इकरा
रेटिंग एजेंसी इकरा ने उम्मीद जताई है कि रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन 1 अप्रैल को मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरें अपरिवर्तित रख सकते हैं। महंगाई में नरमी और उसके वांछित स्तर पर आने के मिल रहे संकेतों के मद्देनजर आरबीआई गवर्नर की तरफ से इस तरह की पहल संभव है।
रेटिंग एजेंसी ने एक नोट में कहा है कि उपभोक्ता महंगाई दर फरवरी में नरम पड़कर 8.1 फीसदी पर आ गई है, जो उर्जित पटेल समिति द्वारा सुझाए गए चालू कैलेंडर वर्ष के लिए तय लक्ष्य 8.0 फीसदी के करीब आ गई है। इसलिए हमारा मानना है कि आगामी मौद्रिक समीक्षा में यथास्थिति बरकरार रह सकती है।
इकरा का कहना है कि मार्च के शुरू में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि महंगाई पर दबाव डाल सकती है। हालांकि, फिलहाल इसका मौद्रिक नीति पर असर नहीं दिखाई देगा। इसके अलावा, खराब मानसून की आशंका को लेकर भी भय बना हुआ है कि इसका महंगाई के ऊपर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि अभी तक रिजर्व बैंक ने औपचारिक रूप से मुद्रास्फीतिक लक्ष्य को नहीं अपनाया है। उर्जित पटेल समिति की सिफारिशों के अनुसार जनवरी 2015 तक उपभोक्ता महंगाई दर 8 फीसदी और जनवरी 2016 तक घटाकर 6 फीसदी पर आने का लक्ष्य रखा गया है।