भारत में लगातार ऊंची महंगाई दर अर्थव्यवस्था की रिकवरी पर भारी पड़ रही है। रेटिंग एजेंसी मूडीज का कहना है कि खाद्य महंगाई वैश्विक औसत से काफी ज्यादा है और भारत की मुद्रास्फीति में इसकी अहम भूमिका है।
मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने एक रिपोर्ट में कहा है कि महंगाई दर लगातार ऊंचे स्तर पर बने रहने से भारत की सॉवरेन रेटिंग पर भी बुरा असर पड़ रहा है। महंगाई बढ़ने से घरेलू पूंजी की लागत बढ़ने के साथ घरेलू खरीद क्षमता कम होती है। इसका नतीजा कम बचत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की क्षमता घटने के रूप में भी सामने आता है।
जुलाई में थोक महंगाई दर 5.19 फीसदी रही है, वहीं खाद्य महंगाई बढ़ कर 8.43 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है। थोक महंगाई में खाद्य महंगाई का हिस्सा 14 फीसदी से अधिक होता है।
मूडीज के मुताबिक खाद्य उत्पादन में ज्यादा इजाफा न होने से महंगाई दर का ऊंचा स्तर बना रहने की आशंका है, इससे अर्थव्यवस्था के ग्रोथ की संभावनाएं सीमित होती हैं। मूडीज ने स्थिर आउटलुक के साथ भारत को बीएए3 रेटिंग दी है।