देश में 1993 और उसके बाद से आवंटित कोयला ब्लॉकों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध करार दिए जाने के फैसले पर उद्योग संगठन फिक्की ने कहा है कि वह हमेशा से नीतियों के पारदर्शी और संविधान सम्मत होने की वकालत करता आया है।
फिक्की के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला ने कहा कि प्रक्रिया में अगर कोई भी गड़बड़ी सामने आती है, तो स्वाभाविक रूप से कानून अपना काम करेगा।
उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक आवंटन के मामले में कोर्ट के बाद यह चिंता एक बार फिर से सामने आ गई है कि सरकार की नीतियां और प्रक्रियाएं ऐसी नहीं होनी चाहिए जिनसे किसी भी तरह उद्योगों और निवेशकों के भरोसे को चोट पहुंचे।
उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक के मामले में अगर सभी आवंटन रद्द किए जाने जैसा कोई कदम उठाया जाता है, तो इससे कारोबारी और निवेशकों की धारणा पर असर पड़ेगा।
इसके साथ ही इससे करीब 2.86 लाख करोड रुपये की परिसंपत्तियों के नॉन परफार्मिंग हो जाने के साथ ही बड़ी संख्या में रोजगार का नुकसान होगा। कोल सेक्टर पर कोई बुरा प्रभाव पड़ने से देश की ऊर्जा सुरक्षा (एनर्जी सिक्योरिटी) भी बुरी तरह प्रभावित होगी।