रेल बजट में हर वर्ष 100 से अधिक नई ट्रेनें चलानें की घोषणा की जाती है। संभावना है कि रेल मंत्री पवन कुमार बंसल इस बार भी 100 नई ट्रेनें चलाने की घोषणा कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त कई एक्सप्रेस ट्रेनों की सेवाओं का विस्तार किए जाने और कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनों की फेरों का संख्या भी बढ़ाए जाने की भी संभावना है।
गौरतलब है कि रेल बजट 26 फरवरी को संसद में पेश किया जाएगा। रेलमंत्री पवन कुमार बंसल का यह पहला रेल बजट है। कांग्रेस के कोटे से 17 सालों बाद कोई मंत्री रेल बजट पेश करेगा।
केंद्र सरकार इस रेल बजट में यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है। हालांकि यात्रियों की बढ़ती संख्या का समाहित कर पाना रेलवे के लिए अब भी सबसे बड़ी चुनौती है।
आंकड़ों के मुताबिक, देश में ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या प्रतिवर्ष औसतन 5 फीसदी की दर से बढ़ रही है।
हालात ये हो गए हैं कि रेलवे के 60 हजार डिब्बों में फिलहाल रोजाना दो करोड़ 40 लाख यात्री सफर कर रहे हैं। एक डिब्बे में औसतन लगभग चार सौ यात्रियों का भार है।
ये आंकड़े आम दिनों के हैं, त्योहारों और भीड़भाड़ के दिनों में स्थिति क्या होती है, इसका कोई हिसाब नहीं है। फिर भी रेलवे पर्याप्त ट्रेनों का इंतजाम करने में तनिक भी रूचि नहीं दिखा रहा है।
इस बार भी बजट में 100 के आसपास ही नई ट्रेनें चलाए जाने की संभावना है।
ट्रेने चलाने में भी होती है राजनीति
रेल मंत्रालय नई ट्रेनों की घोषणा करता तो यात्रियों की सुविधा के लिए है लेकिन इनके आवंटन में भी राजनीति की जाती है। रेलवे विभिन्न राज्यों की जरूरतों, यात्रियों की सुविधाओं की बजाय सत्ताधारी पार्टी के राजनीतिक फायदे का अधिक ध्यान रखता है। ऐसे में सर्वाधिक नुकसान आम यात्रियों का होता है।
अब जब की संभवाना जताई जा रही है कि रेलवे इस बार बजट में 100 नई ट्रेनों का तोहफा दे सकता है, क्या ये सवाल पूछा जाना लाजिमी नहीं हो जाता कि यात्रियों की बढ़ती संख्या और सुविधाओं के अभाव के बीच इतनी ट्रेनें पर्याप्त होंगी।