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ग्रामीण इलाकों में सुविधाएं बढ़ाने पर जोर

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में ग्रामीण इलाकों का खास ख्याल रखा है। गांव में सड़क, बिजली, पानी और रोजगार के मौके बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने ग्रामीण विकास से जुड़े मौजूदा योजनाएं के कायाकल्प का संकेत दिया है।
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अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में शुरू हुई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को 14389 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। वित्त मंत्री बजट भाषण में कहा कि इस योजना की कामयाबी को देखते हुए इस और बेहतर बनाया जाएगा।

सरकारी खजाने की सेहत को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय का बजट पिछले साल 80194 करोड़ रुपये से घटाकर 7502 करोड़ रुपये तक सीमित रखा गया है। लेकिन जल संसाधन मंत्रालय का बजट 1500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3245 करोड़ रुपये हो गया है। पंचायती राज और भू-संसाधन विकास केबजट में खासतौर पर कटौती की गई है।
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गांवों में मिलेगा घर

ग्रामीण आवास के लिए 8 हजार करोड़ का बजट तक किया गया है। वर्ष 2022 तक सबके लिए आवास के चुनावी वादे को निभाने के लिए ग्रामीण आवास के लिए 8 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।

इसके जरिए नेशनल हाउसिंग बैंक ग्रामीण आवास से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाएगा।

मनरेगा की उत्पादकता बढ़ाने के लिए इस योजना को खेती के साथ जोड़ा जाएगा। मनरेगा की वजह से महंगाई और श्रमिकों की किल्लत बढ़ने जैसे आरोपों के बावजूद सरकार ने इसे 34 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है।

अरबन के बजाय रूरबन मिशन: गुजरात मॉडल से सीख लेते हुए मोदी सरकार ग्रामीण इलाकों में सुविधाएं बढ़ाने के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूरबन मिशन शुरू करेगी। इसके लिए फिलहाल 100 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
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बिजली-पानी की होगी उपलब्‍धता

दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना: ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति को बढ़ावा देने केलिए 500 करोड़ रुपये की दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना का ऐलान किया गया है। यह पैसा ग्रामीण क्षेत्रों केलिए अलग फीडर और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होगा।

तहसीलों का पिछड़ापन दूर करने के लिए देश के 272 जिलों में लागू बैकवर्ड रिजन ग्रांट फंड योजना में सुधार करते हुए इसके जरिए सब-डिस्ट्रिक्ट पर भी ध्यान दिया जाएगा। इस फंड का इस्तेमाल ग्राम सभाओं और पंचायतों के कामकाज व सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी किया जाएगा।

पेयजल के लिए 3600 करोड़ की योजना: दूषित जल की मार झेल रहे देश के 20 हजार गांव-बस्तियों के लिए सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत 3600 करोड़ रुपये का बजट दिया है। इसके जरिए समुदाय स्तर पर जल-शोधन किया जाएगा।
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