भारत में बिजली वितरण में वित्तीय और परिचालन संबंधी अव्यवस्था को दूर करने के लिए विश्व बैंक ने ऊर्जा सेक्टर में बड़े पैमाने पर सुधारों का प्रस्ताव सामने रखा है। विश्व बैंक ने वितरण व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकारों, उनकी बिजली इकाइयां और राज्य विद्युत नियामक आयोग (एसईआरसी) के बीच सह-संबंधों को खत्म करने की आवश्यकता जताई है। विश्व बैंक का कहना है कि ऊर्जा सेक्टर में राजनीतिक दखलंदाजी समाप्त करने के लिए ऐसा कदम उठाना जरूरी है।
विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट ‘इंडिया पावर सेक्टर डायग्नोस्टिक रिव्यू- मोर पावर टू इंडिया: द चैलेंज ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन’ में कहा है कि राज्य सरकारों, उनकी बिजली इकाइयां और एसईआरसी के बीच के सह-संबंध को कमजोर करना महत्वपूर्ण है। राज्य सरकारों के राजनीतिक हित और हस्तक्षेप को समाप्त करने और सरकारी कंपनियों को दंडित करने के लिए आयोगों की दक्षता को बढ़ाने की खातिर यह जरूरी है।
कैसे पैदा होगी बिजली?
विश्व बैंक ने रिपोर्ट में ऊर्जा सेक्टर के लिए अधिकाधिक नियामकीय स्वायत्तता पर जोर दिया है। जबकि, बिजली वितरण सेगमेंट के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए बिजली कंपनियों और राज्य विद्युत नियामक को अधिक जवाबदेह बनाने की बात कही है।
विश्व बैंक का मानना है कि देश की विविध जरूरतों को देखते हुए भारत को विभिन्न सेवा प्रदाता मॉडलों को अपनाना चाहिए। सरकार को सेक्टर की बुनियादी क्षमता विकसित करने के लिए ज्वाइंट वेंचर, फ्रेंचाइजी, मैनेजमेंट कांट्रैक्ट जैसे मॉडलों पर विचार करना चाहिए।
ग्रामीण भारत में कैसे पहुंचेगी बिजली?
विश्व बैंक का कहना है कि ग्रामीण और शहरी भारत के लिए अलग-अलग मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है। शहरी क्षेत्रों के लिए लाइसेंसी, फ्रेंचाइजी या पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल कारगर हो सकते हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में लिए एनटीपीसी जैसी सरकारी बिजली कंपनी से कम दरों पर बिजली खरीद पर राज्य डिस्कॉम के जरिए विद्युत आपूर्ति की जानी चाहिए।
विश्व बैंक ने कहा कि बिजली कंपनियों को अपनी जवाबदेही पर कुछ खास क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की अनुमति देने के लिए डिस्कॉम के बीच फ्रेंचाइजी मॉडल को प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे डिस्कॉम ग्रामीण क्षेत्रों में धीरे-धीरे अपनी सेवाओं का विस्तार करने में सक्षम होंगे। सेवाओं में सुधार और कनेक्शनों को बढ़ाने के लिए विश्व बैंक ने परिचालन और रखरखाव ठेकेदारों को नियुक्त करने का सुझाव दिया है।
गरीबों के लिए होगी बिजली व्यवस्था
वितरण क्षमता बेहतर बनाने के लिए विश्व बैंक ने सरकार पर वित्तीय दबाव घटाने की वकालत की है। विश्व बैंक ने कहा है कि घरेलू टैरिफ स्ट्रक्चर को तर्कसंगत बनाकर ऊर्जा क्षेत्र के लिए गरीबी रेखा के नीचे वाले परिवारों को चिन्हित किया जाए। इसके लिए बैंक ने सुझाव दिया कि गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों की पहचान के लिए एक सटीक व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जिससे इन परिवारों को सब्सिडी उपलब्ध कराई जा सके। हालांकि, जबतक यह व्यवस्था मूर्तरूप नहीं लेती है, तबतक टैरिफ स्ट्रक्चर को तर्कसंगत बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।
किस दर पर मिलेगी बिजली?
इसके लिए इंक्रीमेंटल ब्लॉक टैरिफ की बजाय वॉल्यूम डिफरेंसिएटेड टैरिफ व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए। वॉल्यूम डिफरेंसिएटेड टैरिफ व्यवस्था में परिवारों को कुल मासिक खपत के आधार पर समूहों में बांट दिया जाता है और एक समूह में प्रत्येक परिवार को समान दरों से बिजली खपत की एवज में भुगतान करना होता है।
विश्व बैंक ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित आरजीजीवीवाई और आर-एपीडीआरपी जैसे बड़े कार्यक्रमों का इस्तेमाल बिजली का सही इस्तेमाल और राज्य सरकारों के कदमों को प्रोत्साहित करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बनाने की जरूरत है।