ज्योति के पिता शंकर लाल नागदेव का कहना है कि कानपुर एक विधायक और दो उद्योगपति पीयूष और मनीषा की मदद कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन पर बेवजह दबाव बना रहे हैं। जेल में आरोपियों को सुविधाएं दिलाने के लिए पैरवी भी कर रहे हैं।
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इसीलिए उन्होंने उनकी शिकायत सीएम अखिलेश यादव से की है। सीएम ने उन्हें भरोसा दिया है कि घटना की निष्पक्ष जांच होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उधर, जबलपुर (मध्य प्रदेश) गई पुलिस टीम ने ज्योति के परिजनों, सहपाठी रहे लोगों, स्कूल और कालेज में जाकर प्रबंधन और टीचरों से पूछताछ की। पुलिस का दावा है कि वहां कई अहम सुराग हाथ लगे हैं।
जबलपुर निवासी कारोबारी शंकर लाल नागदेव ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि विधायक और दो उद्योगपतियों को थाने से लेकर जेल तक पीयूष और मनीषा की पैरवी करते देखा गया है। दोनों उद्योगपतियों में से एक नामचीन पान मसाला कारोबारी है।
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पीयूष के मददगार- 'एक विधायक, दो उद्यमी'
उनकी सीएम अखिलेश यादव से शिकायत की है। ताकि ज्योति हत्याकांड की विवेचना प्रभावित न हो सके और हत्यारोपियों को कड़ी सजा मिल सके। शंकर लाल ने बताया कि सपा के एक कद्दावर नेता भी पीयूष की मदद कर रहे थे, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हिदायत पर वह पीछे हट गए हैं।
इधर, सीओ गोविंद नगर ओम प्रकाश सिंह की अगुवाई में जबलपुर गई पुलिस टीम ने शुक्रवार को ज्योति के घर जाकर उनके पिता शंकर लाल नागदेव, मां कंचन नागदेव, भाई विशेष, चाचा राजा, अहमदाबाद में रहने वाली बुआ मोनिका समेत परिवार के कई लोगों से पूछताछ की।
टीम ने धारा 161 केतहत इन सभी लोगों के बयान भी दर्ज किए। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने उनसे ज्योति के व्यवहार, हॉबी, ससुराल वालों और पति पीयूष से रिश्तों के बारे में सवाल पूछे। यह भी पूछा कि ज्योति ने उन्हें पीयूष के प्रेम संबंधों की जानकारी दी थी या नहीं। पीयूष का उसके प्रति व्यवहार कैसा था।
जबलपुर गई टीम को हाथ लगे अहम सुराग
पुलिस टीम ज्योति के कालेज सेंट एलासिस पहुंची। वहां कालेज प्रबंधन और प्रिंसिपल से बातचीत की। इस कालेज से ज्योति ने बीएड किया था।
यहां से टीम क्रूमेंट कान्वेंट स्कूल पहुंची। यहां पहले ज्योति पढ़ाती थी। पुलिस ने ज्योति के साथ पढ़ाने वाली टीचरों से भी पूछताछ की।
सूत्रों के मुताबिक टीम ने परिवार और स्कूल प्रबंधन से ज्योति की दोस्तों के नाम-पते भी लिए। इसके बाद घर जाकर उनके बयान दर्ज किए।
पुलिस अफसरों का दावा है कि जबलपुर गई टीम को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। इनसे विवेचना की कड़ी से कड़ी जोड़ी जाएगी। पुलिस टीम के रविवार को टीम ने शहर लौटने की उम्मीद है।
मनीषा के माता-पिता समेत 11 को सफीना नोटिस
हाईप्रोफाइल ज्योति हत्याकांड में सफीना नोटिस मिलने पर पीयूष के परिवार के तीन लोग थाने में हाजिर हुए और सवालों का सामना किया। दूसरी तरफ पुलिस मनीषा और पीयूष का आमना-सामना कराकर तहकीकात करना चाहती है। इसके लिए कोर्ट में अर्जी देकर दोनों की दोबारा रिमांड मांगी गई है।
पुलिस ने बताया कि पीयूष के परिजनों से दोनों के संबंधों, ज्योति के प्रति पीयूष के व्यवहार, मनीषा से संबंध आदि के बारे में पूछताछ की गई है। मनीषा माखीजा के माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों, नौकरों समेत 11 लोगों को भी सफीना (धारा 160) का नोटिस जारी कर थाने में तलब किया गया है। तीन दिन में इन्हें अपना बयान दर्ज करा देना है। पुलिस का कहना है कि जिन्हें नोटिस जारी किया गया है, वे नहीं आते तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की एक टीम पीयूष, मनीषा और अन्य आरोपियों के मोबाइल की कॉल तथा मैसेज की डिटेल लेने दिल्ली गई है। यह टीम मोबाइल कंपनियों को बाकायदा पत्र देकर प्रमाणपत्र भी लेगी कि कंपनी ने नियमानुसार मोबाइल की डिटेल मुहैया कराई है। लखनऊ गई टीम हत्यारोपियों के मोबाइल की कॉल और मैसेज की डिटेल एवं कंपनी के अधिकारियों से प्रमाणपत्र लेकर लौट आई है।
एसएसपी के. सुनील इमैनुएल ने बताया कि ज्योति हत्याकांड की विवेचना तेजी से चली है। हत्या जैसे संगीन अपराध में तीन महीने में विवेचना पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने का प्रावधान है। उनकी कोशिश है कि एक महीने के भीतर आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी जाए, ताकि हत्यारोपी जेल से बाहर न आ सकें।
ज्योति मर्डर केस के अभियुक्त पीयूष श्याम दासानी सभी अन्य अभियुक्तों को जेल में अलग-अलग बैरकों में शिफ्ट कर दिया गया है। अभी तक इन सभी को मुलाहिजा बैरक में रखा गया था। जेल में सुविधाएं देने के आरोपों को लेकर कार्रवाई के डर से अब जेल अफसरों ने कड़ाई बरतना शुरू कर दिया है।
जेल प्रशासन ने पीयूष को बैरक नंबर आठ में शिफ्ट किया है। वहीं अभियुक्त रेनू कनौजिया को एक नंबर, सोनू को 17 नंबर आशीष को 20 और अवधेश को चार नंबर बैरिक में भेजा गया है। जेल में हर नए बंदी को पहले 10 दिन मुलाहिजा बैरिक में रखा जाता है। माना जा रहा है कि डीएम और एसएसपी के छापे में पीयूष और मनीषा को सुविधाएं दिए जाने के खुलासे के बाद जेल प्रशासन ने सख्ती बरतना शुरू किया है। जेल अधीक्षक पीडी सलोनिया ने सभी अभियुक्तों को अलग-अलग बैरिकों में भेजे जाने की पुष्टि की।