टेलीकॉम कंपनियों को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने एक बार फिर से खुशी का मौका दे दिया है। टेलीकॉम कंपनियों के लिए अब विलय और अधिग्रहण करना आसान हो जाएगा।
बृहस्पतिवार को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने टेलीकॉम क्षेत्र के अधिग्रहण और विलय संबंधी नियम जारी कर दिए हैं। नए नियम के तहत टेलीकॉम कंपनियां इसके तहत अधिग्रहण या विलय के बाद कंपनी की बाजार में कुल हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकेगी। अब तक यह सीमा 40 फीसदी थी। हालांकि नए नियमों के तहत कंपनियों को लिए पहले से मौजूद कंपनियों का अधिग्रहण करना महंगा होगा।
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डीओटी) के अनुसार कोई कंपनी यदि किसी ऐसी कंपनी का अधिग्रहण या विलय करती है, जिसने स्पेक्ट्रम पुराने रेट के आधार पर ले रखा है, तो अधिग्रहण करने वाली कंपनी को मौजूदा स्पेक्ट्रम रेट के आधार पर सरकार को अतिरिक्त राशि चुकानी होगी। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि यदि किसी कंपनी ने पहले स्पेक्ट्रम ‘पहले आओ और पहले पाओ की नीति’ के तहत 1,650 करोड़ रुपये के रेट पर पूरे देश के लिए स्पेक्ट्रम खरीदा था।
अब कोई कंपनी उस कंपनी का अधिग्रहण करेगी, तो उसे मौजूदा बाजार रेट 13,500 करोड़ रुपये के आधार पर अतिरिक्त राशि सरकार को चुकानी होगी।
डीओटी ने इसी तरह 50 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के संबंध में स्पष्ट किया है कि 50 फीसदी हिस्सेदारी ग्राहकों की संख्या और दोनों कंपनियों के रेवेन्यू के आधार पर तय होगी। इसके अलावा कंपनियों को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के लिए बैंक गारंटी भी देनी होगी। टेलीकॉम सेक्टर खास तौर से विलय और अधिग्रहण संबंधी नियमों को जल्द लागू करने के लिए सरकार से मांग कर रहा था।
ऐसा इसलिए हैं कि एयरटेल, वोडाफोन जैसी बड़ी कंपनियों की देश की छोटी टेलीकॉम कंपनियों पर नजर है। हाल ही में एयरटेल ने मुंबई में लूप मोबाइल को खरीदा है। सरकार ने कंपनियों के लिए नियम आसान करते हुए बाजार हिस्सेदारी की 40 फीसदी सीमा को बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सेक्टर में विलय और अधिग्रहण की गतिविधियां देखी जा सकती है।