डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट के साथ-साथ सीरिया में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका ने देश की सरकारी तेल कंपनियों को दोहरे संकट में ला खड़ा किया है।
एक ओर जहां रुपए में गिरावट से इनके लिए विदेश से कच्चे तेल का आयात महंगा होता जा रहा है, वहीं मिस्र व सीरिया जैसे मध्य-पूर्व के देशों में हालात बिगड़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बढ़ती जा रही है।
इस दोतरफा मार से सरकारी तेल कंपनियों की अंडर रिकवरी (घाटा) और बढ़ने के हालात पैदा हो गए हैं।
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ऐसे में डीजल की कीमतों में तीन से चार रुपए प्रति लीटर और रसोई गैस में 10 से 20 रुपए प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी किए जाने के आसार दिख रहे हैं।
अंतर बैंकिंग मुद्रा कारोबार के दौरान रुपया डॉलर की तुलना में 68.75 रुपए प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया।
दूसरी ओर सीरिया पर संभावित सैनिक कार्रवाई की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 117 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर निकल गया, जो कि छह माह का उच्चतम स्तर रहा।
तेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मौजूदा हालात में तेल कंपनियों के लिए डॉलर में किए जाने वाले भुगतान का बोझ बढ़ता जा रहा है।
इससे इनकी अंडर रिकवरी पिछले वित्त वर्ष के 1,61,029 करोड़ रुपए की तुलना में बढ़कर इस बार 2 लाख करोड़ रुपनये से पार चले जाने की आशंका है।
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ऐसी हालत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय है। हालांकि वित्त मंत्रालय ने मौजूदा वित्त वर्ष में तेल कंपनियों की अंडर रिकवरी 8 हजार करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन जिस समय यह अनुमान तय किया गया था, उस वक्त रुपए के भाव 54 रुपए प्रति डॉलर के स्तर पर थे।
अब इसके बढ़ कर 68 रुपए प्रति डॉलर को भी पार कर जाने से कंपनियों की अंडर रिकवरी में भारी बढ़ोतरी तय है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में एक डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से तेल कपंनियों की कुल अंडर रिकवरी में 4 हजार करोड़ रुपए का इजाफा हो जाता है।
इसी तरह डॉलर की तुलना में रुपए में गिरावट से अंडर रिकवरी में 8 हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो जाती है।