संसद में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण के साथ ही गुरुवार को बजट सत्र प्रारंभ हो गया। इस सत्र में 26 फरवरी को रेल बजट, 27 को आर्थिक समीक्षा और 28 को आम बजट पेश होगा। भ्रष्टाचार और महंगाई के आरोपों से घिरी यूपीए सरकार का संभवतः ये अंतिम आम बजट होगा।
प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने के बाद वित्तमंत्री बने पी चिदंबरम इस बार अपना पहला बजट पेश करेंगे। चिदंबरम के पद संभालने के बाद सरकार ने अर्थव्यवस्था में तूफानी तेजी लाने के लिए रिटेल में एफडीआई, डीजल की कीमतों नियंत्रणमुक्त करने और रियायती सिलेंडरों की संख्या सीमित करने जैसे फैसले कर चुकी है।
इन फैसलों का अर्थव्यवस्था पर खास प्रभाव तो नहीं दिखा लेकिन महंगाई ने जरूर आम आदमी की कमर तोड़ दी। लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुटी यूपीए सरकार इस बजट से जनता का जोड़ने की उम्मीद कर रही है और जनता महंगाई से राहत और रोजगार की उम्मीद कर रही है।
बजट से उद्योग जगत की उम्मीदें
अर्थव्यवस्था की गिरती दर उद्योग जगत की मुख्य चिंता का विषय है। उद्योग जगत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बजट विकास को गति दे पाएगा। पिछले वर्ष वैश्विक आर्थिक मंदी के प्रभाव भारत की आर्थिक व्यवस्था पर भी दिखें हैं। भारत की आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। उद्योग जगत की निगाह चिदंबरम के बजट पर है कि क्या वित्तमंत्री के उद्योगों के बिगड़े मूड को संभालने के लिए कोई तरकीब निकालेंगे।
बजट से आम आदमी की उम्मीदें
लगातार बढ़ती महंगाई ने पहले से ही आम आदमी की कमर तोड़ रखी है। ऊपर से लोगों की आय में कुछ खास वृद्धि नहीं हुई। ऐसे में लोगों की उम्मीद है कि इस बार बजट में वित्त मंत्री महंगाई से तो निजात दिलाएंगे ही साथ ही कुछ ऐसे उपाय भी करेंगे जिससे लोगों की जेब में कुछ पैसे भी आएं। रोजगार और नई नौकरियों का सवाल भी इस बजट के केंद्र में हो सकता है।
महंगाई से राहत, रोजगार या तेज आर्थिक विकास, हमें बताएं, बजट-2013 से क्या हैं आपकी उम्मीदें?