काले धन पर शिकंजा कसने और इसके स्रोतों को बंद करने के लिए सरकार के अगले कुछ महीने बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इसके लिए बजट में भी कुछ प्रावधान हो सकते हैं। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने संकेत दिया है कि इसके लिए देश-विदेश सभी जगह प्रयास किए जाएंगे।
अरूण जेटली ने अपनी ६२वीं वर्षगांठ पर सोशल साइट फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा है कि सरकार काले धन से लडऩे के लिए पूरी तरह से तैयार है और अगले कुछ वर्षोंं के दौरान इस दिशा में कई कदम उठाये जाएंगे। ये कदम देश में तो उठेंगे ही, विदेशों में भी उठेंगे। उनका कहना है कि यदि सरकार इस दिशा में सफलता हासिल करती है तो इससे अर्थव्यवस्था को एक नया बल मिलेगा।
उनके मुताबिक मई २०१४ में सत्ता में आने के बाद काले धन पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करना था। इसके लिए उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया था ताकि विदेशों में जमा काला धन को वापस लाया जा सके या देश में ही इसे पैदा होने से रोका जा सके। उनका मानना है कि जब काले धन पर अंकुश लगेगा तो बाजार में तरलता बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा। आर्थिक सुधार के बारे में उन्होंने लिखा है कि बीते कुछ महीनों में सरकार ने कई सुधार किये हैं और कई और किये जाने हैं। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का संकेत है कि इसके लिए बजट में भी कुछ प्रावधान हो सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि बीते अक्टूबर के दौरान औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) गिर कर नकारात्मक ४.२ फीसदी पर आ गया था जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह १.२ फीसदी था। इसलिए तो उद्योग जगत सरकार पर दवाब डाल रहा है कि वह ऐसी नीतियां बनाये, जिससे औद्योगिक उत्पादन बढ़े, बाजार में मांग बढ़े ताकि इससे अर्थव्यवस्था पर गुणक प्रभाव पड़ सके।
इसी क्रम में बैंकों की ब्याज दरें घटाने की मांग की जा रही है क्योंकि नवंबर २०१४ में खुदरा कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर घट कर ४.३८ फीसदी पर आ गई है जो कि ऐतिहासिक है।