सार्वजनिक बैंक कर्ज वसूलने में अब पहले की तुलना में अधिक सख्त रुख अपना सकते हैं। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सार्वजनिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों से कहा है कि वह कर्ज वसूलने में पूरी तरह से सख्ती बरतें।
यदि वह ऐसा नहीं करते हैं, तो बैंकों के एनपीए (गैर निष्पादित संपित्तयां) बनते कर्ज बैंकिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बैंक कर्ज वसूली में कंपनी की बैलेंसशीट के मुताबिक कार्रवाई करें, उन्हें इस प्रक्रिया में कंपनियों के बड़े प्रमोटर्स का ध्यान नहीं रखना चाहिए।
वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सोमवार को सार्वजनिक बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक में कर्ज वसूली प्रक्रिया में सख्ती बरतने के साथ पुराने और नए प्रोजेक्ट्स में बैंकों की फंसी पूंजी पर चिंता जताई। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह के प्रोजेक्ट्स को शुरू करने के लिए भी लगातार कदम उठा रही है।
बैंक प्रमुखों की बैठक के बाद वित्त मंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि प्रमोटर्स को कंपनी में पूंजी डालनी होगी। कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वह लिये कर्ज को लौटाएं। उम्मीद है कि बैंक कर्ज वसूली में सख्त कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि देश सक्षम प्रमोटर्स और बीमार कंपनी को बर्दाश्त नहीं कर सकता है।
साथ ही उन्होंने बैंकिंग सहित विभिन्न सेक्टरों में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) की मौजूदा सीमा को बढ़ाने की भी वकालत की है। अटके प्रोजेक्ट्स के विषय में चिदंबरम ने कहा कि पावर, कोयला, स्टील, सड़क आदि क्षेत्र चिंता का विषय हैं।
सात लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट अटके
विभिन्न क्षेत्रों के तहत कुल 215 प्रोजेक्ट्स हैं, जो रुके पड़े हैं। इन प्रोजेक्ट्स की लागत करीब सात लाख करोड़ रुपये हैं। इनके लिए बैंकों ने करीब 54 हजार करोड़ रुपये कर्ज के रूप में दिए हैं।
नए प्रोजेक्ट्स में 46 हजार करोड़ अटके
फिलहाल करीब 126 नए प्रोजेक्ट्स हैं, जो कार्यान्वित नहीं हो पा रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत 3.55 लाख करोड़ रुपये हैं। इनके लिए बैंकों ने 46 हजार करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इनमें से 68 सड़क क्षेत्र और 40 पावर क्षेत्र के प्रोजेक्ट हैं।
काले धन पर रिपोर्ट का इंतजार
वित्त मंत्री के अनुसार बैंकों के लगे आरोपों पर आरबीआई और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज नजर रखे हुए। बैंक खुद भी इसकी जांच कर रहे हैं। ऐसे में जांच रिपोर्ट आने का इंतजार करना चाहिए।
बैंक खोलेंगे महिला शाखाएं
महिला बैंक के लिए एमबीएनराव की अध्यक्षता में गठित समिति पहली बैठक कर चुकी है। इस पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा सार्वजनिक बैंकों के तरफ से भी महिला शाखाओं खोलने के प्रस्ताव आए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह बैंक भी महिला शाखाएं खोलेंगे।