यदि मैं कहूं कि इस सप्ताह आप जो कुछ भी पढ रहे हैं, उसमें ये सबसे महत्वपूर्ण लेख है, तो संभव है कि आप विश्वास न करें।
यदि मैं कहूं कि आपके तीन चौथाई दोस्त इससे सहमत हैं, तब आप क्या कहेंगे?
या फिर, यदि मैं आपकों ये बताऊं कि आपकी उम्र, शिक्षा और वेतन वाले हर 10 में से 9 लोगों ने माना कि ये लेख आपके लिए फायदेमंद हो सकता है, तब तो शायद आप मेरी बात मान ही लेंगे।
ये केवल उदाहरण है उन मनोवैज्ञानिक ट्रिक्स या चालाकियों का जिन्हें सेल्समैन, समझते बूझते हुए, या फिर अनजाने में चीजें आपको बेचने के लिए इस्तेमाल करता है।
हमें ये कहते हुए काफी गर्व महसूस होता है कि हमें कोई ऐसे तरीकों से चकमा नहीं दे सकता, हम इन ट्रिक्स से मूर्ख बनने वालों की श्रेणी से ऊपर उठ चुके हैं।
वैज्ञानिक सबूत ये बताते हैं कि ऐसा नहीं है। तो फिर इन ट्रिक्स के इतने कारगर साबित होने का कारण क्या है?
झूठी तुलना करना
इसकी शुरुआत सैकेंड-हैंड या इस्तेमाल हो चुकी कारों को बेचने के लिए हुई थी। 2000 के शुरुआती सालों में रिसर्च के नाम पर कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर रॉर्बट लेवाइन ने एक प्रयोग किया।
पहचान बताए बिना उन्होंने ऐसी कारों की बिक्री करने वाले एक डीलर के यहां सेल्समैन का काम किया था।
उन्होंने अपनी पुस्तक 'द पावर ऑफ परसूएसन: हाउ वी आर बॉट एंड सोल्ड' में अपने अनुभवों का जिक्र किया है।
उन्हें चिंता थी कि वे कारों के मॉडल और उनकी खासियतों के बारे में बातें याद भी रख पाएंगे कि नहीं।
उन्होंने पाया कि कुछेक बातों को ध्यान रखते हुए, ये सारी जानकारी दिमाग में रखने की जरूरत ही नहीं पडती।
सेल्समैन इस्तेमाल की गई कारों के लिए एक बेस रेट तय कर लेता है।
लेवाइन बताते हैं, "ये ठीक वैसा ही है जैसे एस्प्रेसो कॉफी मशीनों का ढेर लगा हो 200 डॉलर प्रति मशीन के हिसाब से। ग्राहक के सामने इन्हीं के साथ एक 400 डॉलर वाली मशीन तुलना के लिए रख दी जाए। फिर सेल्समैन ये भी बता दे, की 400 डॉलर की मशीन में कुछ खास नहीं, 200 डॉलर की मशीन जैसी ही है। अब जाहिर है कि 200 डॉलर वाली मशीन ग्राहक को सस्ती लगेगी और उसकी बिक्री की संभावना भी ज्यादा होगी।"
असलियत ये है कि हममें से ज्यादातर लोग एस्प्रेसो मशीन की कीमत ही नहीं जानते होंगे। इसलिए हमें ये भी नहीं पता होगा कि क्या 200 डॉलर इस मशीन की वाजिब कीमत भी है या नहीं। लेकिन तुलना करें तो 400 डॉलर की मशीन के मुकाबले में तो सस्ती है। कई बार सेल्समैन ऐसे तय करता है बेस रेट।