फिल्मी कहानियां हों या फिर असल जिंदगी। हर लड़का और लड़की चाहते हैं कि जब भी उसे शादी का प्रस्ताव मिले, वो कुछ खास हो। कोई घुटनों के बल बैठकर प्रेमिका को प्रपोज करता है, तो कोई फूल और अंगूठी तोहफे में देकर।
लेकिन मंगोलिया के दाओर प्रजाति में प्रपोज करने के रीति-रिवाज कुछ अलग हैं। न तो यहां के लोग घुटनों के बल बैठते हैं और न ही फूल देते हैं। बल्कि यहां के भावी जोड़े को पहले एक मुर्गी को हलाल करना होता है।
मुर्गी को हलाल करने के बाद ही भावी दूल्हा और दुल्हन अपनी शादी की तारीख तय कर सकते हैं। लेकिन अगर आप सोचते हैं कि पूरी रीत बस यही है, तो जरा ठहरिए। मुर्गी को हलाल करने के बाद उसे पूरा चीरकर उसका लिवर निकाला जाता है।
अब अगर लिवर अच्छे आकार का होता है, तब तो शादी की तारीख तय की जाती है, वरना नहीं। लेकिन शादी तो होनी ही है, ऐसे में जोड़ा एक और मुर्गी काटता है और ये क्रम तब तक जारी रहता है जब तक कि किसी मुर्गी का अच्छा लिवर न मिले।
जनजाति के लोग इसे शुभता से जोड़कर देखते हैं। उनका मानना है कि अच्छा लिवर मिले तो दांपत्य जीवन सुखद रहता है।
लेकिन मंगोलिया के दाओर प्रजाति में प्रपोज करने के रीति-रिवाज कुछ अलग हैं। न तो यहां के लोग घुटनों के बल बैठते हैं और न ही फूल देते हैं। बल्कि यहां के भावी जोड़े को पहले एक मुर्गी को हलाल करना होता है।
मुर्गी को हलाल करने के बाद ही भावी दूल्हा और दुल्हन अपनी शादी की तारीख तय कर सकते हैं। लेकिन अगर आप सोचते हैं कि पूरी रीत बस यही है, तो जरा ठहरिए। मुर्गी को हलाल करने के बाद उसे पूरा चीरकर उसका लिवर निकाला जाता है।
अब अगर लिवर अच्छे आकार का होता है, तब तो शादी की तारीख तय की जाती है, वरना नहीं। लेकिन शादी तो होनी ही है, ऐसे में जोड़ा एक और मुर्गी काटता है और ये क्रम तब तक जारी रहता है जब तक कि किसी मुर्गी का अच्छा लिवर न मिले।
जनजाति के लोग इसे शुभता से जोड़कर देखते हैं। उनका मानना है कि अच्छा लिवर मिले तो दांपत्य जीवन सुखद रहता है।