आपने देखा होगा या नहीं यह हम नहीं जानते लेकिन सुना तो जरुर ही होगा कि तांत्रिक खोपड़ी पर पानी का छींटा मारते हैं और खोपड़ी से आग की लपटें निकलने लगती है।
तांत्रिकों के ऐसे ही जादू-टोने को देखकर लोग कई बार ठगे जाते हैं। असल में यह जादू नहीं और न तांत्रिकों की तंत्र मंत्र विद्या होती है। यह असल में शुद्ध रुप से विज्ञान का चमत्कार होता है।
आपने देखा होगा कि रास्ते पर सामान बेचने वाले अंग्रेजी के कुछ टूटे फूटे शब्दों का प्रयोग कर लोगों को अपना सामान बेचने की कोशिश करते हैं। ठीक उसी प्रकार यह तांत्रिक विज्ञान के कुछ नियमों को जानकर उनका गलत तरीके से फायदा उठाते हैं।
आप जानना चाह रहे होंगे कि आखिर विज्ञान का वह कौन सा तरीका है जिससे तांत्रिक यह चमत्कार दिखाते हैं। तो चलिए अब देखते हैं वह तरीका जिससे तांत्रिक कुछ बुदबुदाते हुए पानी के छींटे मारकर खोपड़ी में आग पैदा कर देता है।
स्प्रिट, फास्फोरेट और पोटास का घोल बनाकर खोपड़ी और दूसरी हड्डियों पर इसकी तीन चार परत चढा दी जाती है। इसके बाद जब भी जरुरत होती है तांत्रिक कुछ भी बुदबुदाते हुए पानी का छींटा मारते हैं।
असल में यह पानी नहीं सल्फयूरिक एसिड होता है जो खोपड़ी पर चढ़े स्प्रिट, फास्फोरेट और पोटास के परत का स्पर्श करते ही अंगारों को पैदा कर देता है।