शैव संप्रदाय के ज्यादातर अखाड़े नागा संन्यासी बनाते हैं लेकिन इनमें एक श्री पंच शंभू अग्नि अखाड़े में नागा संन्यासी के बजाए ब्रह्मचारी बनाने की दीक्षा दी जाती है। खास यह कि ब्रह्मचारी सिर्फ ब्राह्मण शरीर धारी को बनाया जाता है। नागा संन्यासियों की भांति ब्रह्मचारी के चयन की प्रक्रिया भी खासी जटिल है। उसमें वेद-वेदांत का ज्ञान, भगवान में भक्ति और वैराग की भावना भी देखी जाती है। अग्नि अखाड़े में आनंद, चैतन्य, प्रकाश और स्वरूप नाम के ब्रह्मचारी होते हैं।
अग्नि अखाड़े की एक और खासियत यह है कि यहां ब्रह्मचारी बनाने के लिए संख्या बल के बजाए व्यक्ति के संस्कार को देखा जाता है। फिर चाहे हजार में सौ ही इस लायक निकलें, उन्हें ही ब्राह्मण की दीक्षा दी जाती है।
श्री पंच अग्नि अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर ब्रहर्षि श्रीमद् रामकृष्णानंद जी का कहना है कि हर किसी का साधु बनना या भगवा वस्त्र धारण कर लेना ठीक नहीं है। अखाड़े का हमेशा से प्रयास रहा है कि ब्रह्मचारी उसे ही बनाया जाए जो संस्कारवान हो। इसलिए ब्राह्मण को ब्रह्मचारी बनाने के पहले उसकी योग्यता का परीक्षण किया जाता है।
स्वामी जी के मुताबिक योग्यता के बाद ही ब्राह्मण को मंत्र उपदेश दिए जाते हैं। यहां काम पंचगुरु करते हैं। फिर ब्रह्मचारी को भभूत, कंठ, लंगोट आदि प्रदान की जाती है। बताया कि शैव अखाड़े में दशनामी संन्यासी होती हैं लेकिन अग्नि अखाड़े में आनंद, चैतन्य, प्रकाश और स्वरूप नाम के ब्रह्मचारी होते है।
ये चारों नाम ब्रह्मचारी आदि शंकराचार्य भगवान द्वारा स्थापित चारों शंकराचार्य पीठों से अलग-अलग जुड़े हैं। ‘आनंद’ नाम के ब्रह्मचारी ज्योर्तिमठ से जुड़े होते हैं, ‘चैतन्य’ श्रृंगेरीमठ से, ‘प्रकाश’ गोवर्धनमठ से तो द्वारिकापीठ के ब्रह्मचारी अपने नाम के आगे ‘स्वरूप’ उपनाम लगाते हैं। महाकुंभ में अब तक 15 ब्रह्मचारी बनाए गए हैं।
श्रीमहंत कैलाशानंद भी बन सकते हैं महामंडलेश्वर
श्री शंभू पंच अग्नि अखाड़े में श्री महंत कैलाशानंद को जल्द महामंडलेश्वर बनाने की तैयारी की जा रही है। वह अभी पंच अग्नि अखाड़े में सचिव के पद पर तैनात हैं। आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि श्रीमद् रामकृष्णानंद जी के मुताबिक उनका पट्टाभिषेक 10 फरवरी के पहले किया जा सकता है।