महानिर्वाणी की पहल को आगे बढ़ाते हुए पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी ने भी एक महिला संत को महामंडलेश्वर की पदवी सौंपी। अखाड़े की छावनी में ‘चादरविधि’ के तहत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुरियों की प्रमुख शाखा नंगली साहब से जुड़ीं और परमधाम की पीठाधीश्वर स्वामी निर्भयानंद पुरी को महामंडलेश्वर बनाया गया।
बुधवार को पुरोहितों की ओर से मंत्रोच्चार और स्वास्ति वाचन से श्रीशुद्धि के बाद उनका पट्टाभिषेक किया गया। आसन पर बिठाकर जयकारों के बीच सबसे पहले अखाड़े के रमता पंचों ने उन्हें चादर ओढ़ाकर मान्यता दी, फिर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर निरंजनपीठाधीश्वर स्वामी पुण्यानंद गिरि ने चादर ओढ़ाई। इसके बाद अन्य अखाड़ों के प्रतिनिधियों और महानिर्वाणी के सचिवों, श्रीमहंतों की ओर से भी चादर ओढ़ाकर उन्हें समर्थन दिया गया।
इसके बाद उन्होंने अखाड़े के आराध्य भगवान कार्तिकेय के विग्रह का पूजन अर्चन किया और ‘पुकार’ में दो लाख 51 हजार की भेंट चढ़ाई। कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरि, स्वामी सोमेश्वरानंद गिरि, स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि, मां आनंदमयी, स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, श्रीमहंत रवींद्र पुरी, मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि, महंत रामानंद पुरी, महंत हरगोविंद पुरी, महंत विलकेश्वर गिरि, महंत प्रेमगिरि, महंत आनंद गिरि, महंत केशवपुरी, कोठारी आशीष गिरि सहित बड़ी संख्या में अखाड़े के संत, महंत, नागा संन्यासी और श्रद्धालु मौजूद थे। बाद में सभी ने भंडारा में प्रसाद ग्रहण किया।
पांचवीं महिला महामंडलेश्वर
अभिषेक के बाद स्वामी निर्भयानंद पुरी निरंजनी की पांचवीं महामंडलेश्वर बनीं। इससे पहले संतोषी गिरि, संतोषानंद सरस्वती, मां अमृतमयी, योग शक्ति को महामंडलेश्वर बनाया गया है।