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अपनों की तलाश में झेलनी पड़ रही है जलालत

Thu, 14 Feb 2013 09:11 AM IST
अंकुर त्रिपाठी/इलाहाबाद
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क्राउड मैनेजमेंट में उदासीनता से रेलवे स्टेशन पर भगदड़ में तीन दर्जन लोगों की मौत के बाद भी लापरवाही और संवेदनहीनता का आलम बरकरार है। आपदा प्रबंधन में पूरी तरह नाकाम रेलवे और जिला प्रशासन ने दिखावे के लिए अस्पताल परिसर में सहायता केंद्र तो खोले हैं पर वे अपनों की तलाश में भटक रहे लोगों के लिए मददगार नहीं साबित हो रहे हैं।
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स्थिति यह है कि लावारिस शवों और घायलों को देखने के लिए दूर-दूर से आए परेशान और गमगीन लोगों को जलालत झेलनी पड़ रही है। इधर-उधर भटकने के अलावा उन्हें अस्पताल में डॉक्टरों तथा नर्सों की झिड़कियां सुननी पड़ रही हैं। इस बारे में शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है। न कोई मदद करने वाला।

महाकुंभ से पहले आपदा प्रबंधन के नाम पर मॉक ड्रिल का दिखावा तो कई बार किया गया था मगर अब हकीकत सामने आ चुकी है। आपदा प्रबंधन में शामिल एसआरएन अस्पताल में न तो सहायता केंद्र बनाया गया था और न जरूरी व्यवस्था। भगदड़ के बाद घायलों और मृतकों को वहां ले जाया गया तो अफरा-तफरी का आलम बन गया।
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लापरवाही अब तक नहीं दूर हो सकी है। न अफसरों में संवेदना लौटी है। मुख्यमंत्री, रेल मंत्री समेत कई मंत्री, डीजीपी, मुख्य सचिव आकर लौट चुके हैं लेकिन अब भी एसआरएन अस्पताल में अपने रिश्तेदारों और परिजनों की तलाश में आकर लोगों को भटकना पड़ रहा है। बुधवार को शाम तक दर्जनों लोग अस्पताल में परेशान टहलते दिखे।

बिहार में सीतामढ़ी का दिनेश ठाकुर बुधवार सुबह अपने पिता रामदेव ठाकुर (67) और मां दाहौरी देवी (62) की तलाश में एसआरएन अस्पताल आया। वह एसआरएन चौकी पहुंचा तो वहां से उसे वार्ड में जाकर घायलों को देखने को कहा गया। वह वार्ड में घुसा तो नर्सों ने कहा कि बाहर चिपकी लिस्ट देख लो। उसने घायलों को सामने से देखने का आग्रह किया तो मना कर दिया गया। घायलों की लिस्ट देखने के बाद वह लावारिस शवों को देखने के लिए भटकने लगा।

चौकी में उससे कहा गया कि मेडिकल कॉलेज चले जाओ। पूछते हुए वह किसी तरह कॉलेज तक पहुंचा। सासाराम के रविदास, मुगलसराय के सुरेश, सतना के दिवाकर राम समेत दो दर्जन से ज्यादा लोगों को बुधवार शाम तक अस्पताल में अव्यवस्था और संवेदनहीनता झेलनी पड़ी। न सहायता केंद्र उनके काम और न तो पुलिस चौकी।

पीआरओ की बेरुखी और झूठ से गुस्सा
स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी सौरभ दुबे की बेरुखी और बड़बोलेपन से लोगों में भारी गुस्सा है। वार्ड नंबर दो में भर्ती छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) की सरस्वती के साथ रही देवकी बाई (62) भी सीढ़ियों से गिर जख्मी हुई थीं। मंगलवार को कांग्रेस सेवा दल के राजबहादुर गुप्ता ने उन्हें किसी तरह भर्ती कराया था। मगर उन्हें भगदड़ में घायल नहीं माना जा रहा। इस बारे में दुबे ने देवकी के बारे में पूछने पर अक्खड़ लहजे में कहा कि वह कुंभ से घायल होकर आई है। इस पर उन्हें सरस्वती के पास ले जाकर बात कराई गई। तब दुबे ने कहा कि ठीक है, देखते हैं क्या हो सकता है।
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