महाकुंभ की महिमा भी निराली है। अध्यात्म की कुंभनगरी में आधुनिकता की आंधी बह रही है। पुण्य-पाप, ईश्वर और नश्वर शरीर पर प्रवचन देकर करोड़ों श्रद्धालुओं का मन मोहने वाले साधु-संत माया का मोह नहीं त्याग सके हैं। बाबा तो बाबा उनके शिष्यों के पास लग्जरी गाड़ियों का काफिला है।
महंगी और शानदार लग्जरी गाड़ियों के मामले में कुंभनगरी इन दिनों सूबे के सभी महानगरों को पीछे छोड़ चली है। साधु-संतों के शिविरों और पंडालों के बाहर लैंड क्रूजर, बीएमडब्ल्यू, मर्सडीज, पजेरो, स्कोडा, और फारच्यूनर की लाइन लगी है। बाबा भी इसी शान की सवारी में घूम रहे हैं। बाबा के हाथों में आईपॉड, शिष्यों के पास लैपटॉप हाईटेक होने की बानगी पेश कर रहे हैं।
महाकुंभ में राजसी ठाठ और अत्याधुनिक सामान का संगम है। स्वामी अवधेशानंद गिरि, पायलट बाबा, स्वामी चिदानंद मुनिजी शिविरों के बाहर बीएमडब्ल्यू और पजेरो की लाइन है। जूना अखाड़ा के मेलाधिकारी स्वामी विद्यानंद सरस्वती की सवारी बीएमडब्ल्यू और पजेरो से निकलती है।
कैलाशानंद ब्रह्मचारी के शिविर में शिष्यों की सेवा के लिए हर समय तीन पजेरो खड़ी रहती है। मोरारी बापू, आसाराम, योगी सत्यम, आनंद गिरि, नरेंद्र गिरि, रमेश भाई ओझा के शिविर और पंडाल में 40 से 50 लाख वाली लग्जरी गाड़ियों का काफिला रहता है।
साधु-संतों के शिष्यों का दिख रहा जलवा
साधु-संतों के सिंहासन सोने और चांदी के हैं तो उनके हाथ में एप्पल के आईपॉड और ब्लैकबेरी के मोबाइल हैं। बड़े बाबाओं के शिष्यों ने भी हाईटेक होने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वह भी एप्पल के लैपटॉप पर बाबा का कार्यक्रम तय करते हैं। बाबाओं के साथ ही शिष्यों का बड़ा जलवा है। सफारी, इनोवा, फारच्यूनर जैसी गाड़ियां संगम की रेती पर धूल फांक रही हैं। शिष्य उसे खाने-पीने का सामान लाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।