नपुंसकता के कारण प्रेम संबंधों और दांपत्य जीवन में तनाव की स्थिति व रिश्तों में अलगाव और तलाक जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार व्यक्ति के नपुंसक होने में मंगल, शुक्र, शनि, बुध और सूर्य की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण मानी होती है।
इन ग्रहों का खराब होना जीवन में यौण संबंधों की इच्छा का अंत करने वाला हो सकता है। वैदिक ज्योतिष में ऎसे अनेक योगों के बारे में चर्चा की गई है जिन्हें समझकर व्यक्ति की सेक्स क्षमता और उनके काम व्यवहार को पहचानने में मदद मिलती है।
इस अंक में कुछ ऎसे ही महत्व्पूर्ण योगों की बात कर रहे हैं जिससे आप जान पाएंगे कि किस राशि के व्यक्ति कब नपुंसक हो सकते हैं।
मेष राशिः पौरुष की कमी
इस राशि के व्यक्तियों की काम शक्ति बहुत तीव्र मानी गई हैं क्योंकि यह अग्नि तत्व राशि और साथ ही मंगल के प्रभाव में होते हैं।
लेकिन राशि स्वामी मंगल वक्री होकर कुण्डली में अस्त हो रहा हो तो जातक की काम शक्ति में कमी आती है और वह नपुंसकता से प्रभावित हो सकता है।
वृष राशिः तब नपुंसक हो सकते हैं
जिनका जन्म वृष राशि में होता है उनके अंदर उत्तेजना और धैर्य का अनोखा संगम देखने को मिलता है। लेकिन जब इनके राशि का स्वामी शुक्र विषम राशि में होता है।
साथ ही विषम नवांश में स्थित होकर शनि-चंद्रमा के साथ दृष्टि अथवा युति संबंध बनता है तो व्यक्ति नपुंसकता के योग से प्रभावित हो सकता है।
मिथुन राशिः तब यौन संबंध नहीं बना पाते
इस राशि वालों के लिए नपुंसकता के योग का कारक उनका राशि स्वामी बुध होता है। ज्योतिषशास्त्र में बुध नपंसक ग्रह माना गया है।
इस राशि के व्यक्ति की कुण्डली में बुध अगर मिथुन राशि में बैठा हो और शनि बुध से चौथे स्थान में बैठा हो यानी दसवीं दृष्टि से बुध को देख रहा है तो व्यक्ति के नपुंसक होने की संभावना रहती है।
कर्क राशिः तब नपुंसकता की संभावना प्रबल रहती है
इस राशि के व्यक्ति यौण संबंधों में बहुत अधिक भावनात्मक होते हैं। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इस राशि का स्वामी चन्द्रमा सम राशि में बैठे बुध के साथ संबंध बनाता है तो नपुंसकता की संभावना प्रबल रहती है।
सिंह राशिः यौन संबंध का उत्साह कम हो जाता है
जिनका जन्म सिंह राशि में होता है वह यौन संबंधों के प्रति काफी उत्साहित होते हैं। इनमें हमेशा यौन संबंध की चाह बनी रहती है।
लेकिन जब इनके स्वामी ग्रह सूर्य पीड़ित होते हैं। सूर्य शुक्र के साथ कुंडली में बैठा होता है तो यौन संबंध का उत्साह कम हो जाता है।
कन्या राशिः तब नपुंसकता का योग प्रभावी होता है
इस राशि वालों का प्रेम सौम्यता और मंद रुप में आगे बढ़ने वाला होता है। इनमें नपुंसकता का योग तब प्रभावित होता है जब इनकी कुण्डली में सूर्य पहले घर यानी लग्न में बैठा हो। इसके साथ ही कन्या अथवा मीन राशि में बैठा चन्द्रमा उसे देख रहा हो।
तुला राशिः तब यौन संबंध की क्षमता नहीं रहती
जिनका जन्म तुला राशि में होता है उनमें काम भावना प्रबल रहती है। यह यौण संबंध के लिए पहल करने वाले होते हैं।
लेकिन राशि स्वामी शुक्र के साथ मंगल, शनि या सूर्य का संबंध बनता है तो व्यक्ति नपुंसकता से प्रभावित हो सकता है।
वृश्चिक : तब नपुंसकता की समस्या आ सकती है
इस राशि के व्यक्ति में सबकुछ अनुकूल हो तो प्रेम संबंधों में जल्दबाजी दिखाते हैं। लेकिन जब मंगल व सूर्य एक साथ होते हैं और मंगल वक्री होता है तो नपुंसकता की समस्या आ सकती है।
धनु राशिः तब नहीं रहता प्यार का जोश
इस राशि के व्यक्तियों में प्यार और संबंधों को लेकर काफी गर्म जोशी बनी रहती है।
लेकिन धनु राशि का स्वामी गुरु अगर शनि और राहु से प्रभावित हो रहा है तो व्यक्ति का यौण संबंध के प्रति जोश और उत्साह कम हो जाता है।
मकर राशिः पौरुष शक्ति की कमी हो जाती है
मकर राशि वाले यौण संबंधों में काफी संयमी ओर सहज होते हैं इन्हें सामन्य रुप से प्रेम का प्रदर्शन पसंद आता है। यह प्रेम को समय देने वाले होते है।
लेकिन जब इनके राशि स्वामी का संबंध सूर्य और शुक्र के साथ खराब होता है तो पौरुष शक्ति की कमी हो जाती है।
कुम्भ राशिः तब नपुंसकता का प्रभाव देखा जा सकता है
शनि की इस राशि के व्यक्ति यौन संबंध के प्रति काफी शालीन रहते हैं इनका प्रेम व्यवहार साथी को इनकी ओर आकर्षित करने में सहायक होता है।
लेकिन इस राशि व्यक्ति में तब नपुंसकता का प्रभाव देखा जा सकता है जब कुंभ राशि में बैठे मंगल की दृष्टि मकर और वृष राशि में बैठे सूर्य पर हो।
मीन राशिः तब यौन क्षमता कम हो जाती है
इस राशि का स्वामी गुरु वक्री होकर शुक्र, शनि के साथ संबंध बनाता है तो व्यक्ति में नपुंसकता का प्रभाव आ सकता है।
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