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उत्तर प्रदेश चुनाव: सामाजिक समीकरण साधकर सत्ता में लौटने की योजना बना रहे हैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

सार

ऐसा कयास है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए जितिन प्रसाद, पूर्व भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को भाजपा विधान परिषद में भेज सकती है। इसके अलावा भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद भी विधान परिषद में जाने का रास्ता देख रहे हैं। चौथे विधान परिषद सदस्य के रूप में भाजपा अन्य पिछड़ा वर्ग या दलित समुदाय के किसी नेता को अवसर दे सकती है...
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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19 अगस्त को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ दिल्ली पहुंचे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, संगठन मंत्री सुनील बंसल भी आए। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ बैठक, मंत्रणा हुई और दिल्ली से विधानसभा चुनाव 2022 का मंत्र लेकर लखनऊ लौट गए। रास्ते में ही योगी आदित्यनाथ को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की तबियत बिगड़ने की जानकारी मिली। इसलिए वह सीधे कल्याण सिंह को देखने, उनका हाल जानने एसजीपीजीआई पहुंच गए। वहां राज्य के चिकित्सा मंत्री भी थे। जो मंत्र लेकर मुख्यमंत्री पहुंचे हैं, वह सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास ही बताया जा रहा है।

दमखम दिखाएंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

निर्णय लेने में नहीं हिचकने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने विधानसभा सत्र को समय से पहले ही समाप्त करने पर सहमति दे दी थी। अब सरकार की योजना राजनीतिक तैयारी को तेजी से आगे बढ़ाने की है। इस कड़ी में अन्य पिछड़ों को आरक्षण देने से संबंधित विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। अब इसमें आने वाली जातियों की सूची को अंतिम रूप दिया जाना है। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसे लेकर काफी उत्साहित हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी चाहते हैं कि राज्य को इसमें सावधानी के साथ कदम उठाना चाहिए। भाजपा के रणनीतिकार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाबत इसे तुरुप का पत्ता मान रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि इसके जरिए सामाजिक रूप से पकड़ मजबूत की जा सकती है।

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जून से अब तक चार बार आ चुके हैं मुख्यमंत्री

जून महीने में प्रधानमंत्री से मिलने मुख्यमंत्री दिल्ली आए थे। तब राजनीति की खबरों का बाजार काफी गरम था। इसके बाद पिछले एक महीने में मुख्यमंत्री का यह तीसरा दौरा था। इस दौरे का मकसद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाबत लंबित निर्णय को तेजी से आगे बढ़ाना था। राज्य में राज्यपाल द्वारा चार विधान परिषद सदस्य नामित किए जाने हैं। ऐसा कयास है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए जितिन प्रसाद, पूर्व भाजपा अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को भाजपा विधान परिषद में भेज सकती है। इसके अलावा भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के नेता संजय निषाद भी विधान परिषद में जाने का रास्ता देख रहे हैं।

चौथे विधान परिषद सदस्य के रूप में भाजपा अन्य पिछड़ा वर्ग या दलित समुदाय के किसी नेता को अवसर दे सकती है। इस तरह से अगड़ी और पिछड़ी जाति तक सही संदेश देकर भाजपा लक्ष्य साधने का संदेश दे सकती है। हालांकि अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल की निगाह भी इस अवसर पर है। कुल मिलाकर केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि 2017 के विधानसभा चुनाव को केद्र में रखकर भाजपा से तमाम जातियों को जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए। राज्य सरकार के मंत्रिमंडल में तमाम पद रिक्त हैं। समझा जा रहा है कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, संगठन मंत्री सुनील बंसल और केंद्रीय नेतृत्व इस बारे में निर्णय को लेकर एक नतीजे पर पहुंचे हैं। समय पर इसे भी अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
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भाजपा: केंद्र और राज्य एक ताल में

उत्तर प्रदेश भाजपा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कई विरोधी हैं। केंद्र ने इसके बाबत सभी को ताकीद किया था। इसी तरह से कुछ लोगों के बयान या फैलाए गए भ्रम के कारण मोदी सरकार बनाम योगी सरकार का प्रचार बढ़ गया था। उत्तर प्रदेश भाजपा के एक बड़े नेता कहते हैं कि इस तरह के विपक्ष द्वारा फैलाए गए भ्रामक प्रचार पर कामयाबी मिली है और अब पार्टी के कार्यकर्ता बूथ स्तर से भाजपा को मजबूत बनाने में जुट गए हैं। वह कहते हैं कि हमारा अगला लक्ष्य गांव-गांव और लोगों तक केंद्र और राज्य सरकार के कामकाज को पहुंचाना है। बनारस प्रांत के भाजपा नेता ज्ञानेश्वर शुक्ला का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर के बाद हमने विपक्ष  द्वारा फैलाए गए भ्रम को दूर किया। अब लोगों के बीच में प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज को लेकर जा रहे हैं। अक्तूबर 2021 तक पूरे प्रदेश में यह सघन अभियान पूरा हो जाएगा।
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