यूक्रेन में फंसी रिजुल ने बताया कि वह यूक्रेन के रुबिजनी शहर में फंसी हुई है, वहां से पोलेंड की सीमा करीबन 2 हजार किलोमीटर दूर है। भारतीयों का वहां से रेस्क्यू किया जाना है, लेकिन वहां जाएं कैसे यह बड़ा सवाल है।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग के कारण वहां फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर पूरा देश चिंतित है। यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों में श्रीगंगानगर की अनूपगढ की बेटी रिजुल भी शामिल है। रिजुल ने बताया कि उसके साथ लगभग 100 स्टूडेंट रुबिजनी शहर में युद्ध की भीषण परिस्थितियों में फंसे हुए हैं। रिजुल की मां प्रियंका ने बताया कि वह वहां मेडिकल के चौथे वर्ष की छात्रा है। फिलहाल वह परिवार के संपर्क में है और परिजनों से लगातार बात कर रही है। उसके पिता अजय सारस्वत ने इसकी जानकारी दी। इस समय यूक्रेन में हालात बदतर हैं जिससे काफी परेशानी बढ़ गयी है। डॉक्टर बनने गए बच्चों के सपने धूमिल होने लगे हैं।
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रिजुल ने बताया कि उन्हें मार्शल की सुरक्षा में रखा हुआ है। उसने कहा, 'यहां धमाको और गोलीबारी की आवाजों के कारण काफी भयानक मंजर है। भारतीय दूतावास ने उन्हें सुरक्षित भारत पहुंचाने का आश्वासन दिया है, लेकिन दूतावास से भारतीय नागरिकों का सही ढंग से सम्पर्क नहीं हो रहा है। अब हालात यह है कि खाने–पीने सामान और रूपये भी कम पड़ने लगे हैं। सुपर मार्केट और एटीएम में काफी भीड़ के कारण सबको परेशान होना पड़ रहा है।'
रिजुल ने बताया कि वह यूक्रेन के रुबिजनी शहर में फंसी हुई है, वहां से पोलेंड की सीमा करीबन 2 हजार किलोमीटर दूर है। भारतीयों का वहां से रेस्क्यू किया जाना है, लेकिन वहां जाए कैसे। यूक्रेन में आवागमन बाधित है। फ्लाइट्स, ट्रेन–बस और अन्य साधन भी नहीं मिल रहे हैं, जिससे पोलेंड पहुंचा जा सके।
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रिजुल के पिता अजय और मां प्रियंका ने सरकार से उनकी बेटी और अन्य भारतीयों की वतन वापसी की अपील की है। उन्होंने कहा कि भगवान से प्रार्थना है कि सभी जने भारत सुरक्षित लौटे। यूक्रेन में हालात बदतर होने लगे हैं जिससे काफी परेशानी बढ़ गयी है। डॉक्टर बनने गए बच्चों के सपने धूमिल होने लगे हैं। चिंतित परिजन बच्चों और भारतीय दूतावास से सम्पर्क बनाए हुए है तथा बच्चों की हिम्मत बढ़ा रहे हैं।