झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने सोमवार को कहा कि आबकारी कांस्टेबल भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षण के दौरान केवल चार अभ्यर्थियों की मौत हुई। उनका यह दावा राज्य की पुलिस के आंकड़ों के विपरीत है। पुलिस के मुताबिक शारीरिक परीक्षण के दौरान 11 अभ्यर्थियों की मौत हुई है।
चार अभ्यर्थियों की मौत हुई: गुप्ता
गुप्ता ने आंकड़ों की सटीकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये आंकड़े गलत हैं। उन्होंने रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर कहा, "ये आंकड़े कहां से आ रहे हैं? ये प्रमाणिक नहीं है। कुल चार लोगों की मौत हुई है।" उन्होंने मौतों के लिए कोरोना महामारी के बाद बढ़ी हुई हृदय संबंधी समस्याओं को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि डॉक्टर अभ्यर्थियों को व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार व्यायाम करने की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "डॉक्टर भी अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करने की सलाह दे रहे हैं। किसी भी अभ्यर्थी की मौत वास्तव में दुखद है।"
राज्य पुलिस पुलिस ने क्या कहा था
इससे पहले, रविवार को पुलिस महानिरीक्षक (संचालन) अमोल वी. होमकर ने कहा था कि पलामू में चार, गिरिडीह और हजारीबाग में दो-दो, रांची, पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी और साहेबगंज केंद्रों में एक-एक अभ्यर्थी की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि असामान्य मौतों के मामले दर्ज किए गए हैं और जांच जारी है। उन्होंने कहा, झारखंड आबकारी कांस्टेबल भर्ती के लिए शारीरिक परीक्षण 22 अगस्त से शुरू हुए थे और नौ सितंबर तक जारी रहेंगे। 30 अगस्त तक कुल 1,72,772 अभ्यर्थियों ने शारीरिक परीक्षण में भाग लिया। जिनमें से 78,023 सफल रहे।
भाजपा ने झामुमो सरकार पर साधा निशाना
इस बीच, झारखंड भाजपा ने सोमवार को दावा किया कि सरकार की गलती के कारण शारीरिक परीक्षणों के दौरान अब तक कम से कम 13 अभ्यर्थियों की मौत हो चुकी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता उमर बाउरी ने सरकार की स्थिति के प्रबंधन की आलोचना की। बाउरी ने पलामू में कहा, अब तक कम से कम 13 अभ्यर्थियों की मौत हो चुकी है। प्रबंधन की स्पष्ट विफलता है। मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है। यह झामुमो सरकार की विफलता है। जिसने अभ्यर्थियों के प्रति असंवेदनशीलता नहीं दिखाई है।