नीतीश के निर्देश पर मिला दुष्कर्म पीड़िता को अस्पताल में बेड
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दुष्कर्म के बाद चलती ट्रेन से फेंकी गई लखीसराय की रहने वाली पीड़ित 10वीं की छात्रा के प्रति पीएमसीएच के डॉक्टरों का गैर जिम्मेवार रवैया सामने आया है। पीड़िता को न केवल बेड के लिए 12 घंटे इंतजार करना पड़ा, बल्कि उसका समुचित इलाज भी घंटों बाद शुरू हुआ। अस्पताल की लापरवाही की रिपोर्ट मीडिया में आने के बाद सरकार सचेत हुई और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश के बाद पीड़िता के इलाज की समुचित व्यवस्था हो पाई।
इधर, पुलिस ने इस मामले में दो नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। लखीसराय के जिलाधिकारी ने कहा है कि दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है, बाकी पर कार्रवाई मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी। उन्होंने कहा कि तत्काल पीड़ित परिवार को 3 लाख का चेक सौंप दिया गया है।
पीएमसीएच के डॉ एसएन सिन्हा ने कहा है कि पीड़िता का समुचित इलाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रा का इलाज अस्पताल प्रशासन अपने स्तर पर कर रहा है। दवा से लेकर इलाज तक पूरा खर्च अस्पताल उठा रहा है। इधर, इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि निजी अस्पताल में छोटी सर्जरी की गई है, जिससे दुष्कर्म होने का अनुमान लगाया गया है। वैसे जांच के बाद पता चला कि पीड़िता को गंभीर चोट आई है। कमर व पैर की हड्डी फैक्चर है।
जानकारी के अनुसार शनिवार को दुष्कर्म के बाद पीड़िता को चलती ट्रेन से उसे किऊल स्टेशन के पास फेंक दिया था। परिजनों का कहना है कि पहले एक प्राइवेट नर्सिंग होम में इलाज कराने ले गए, लेकिन हालत की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल ने पीएमसीएच रेफर कर दिया।
देर रात जब उसके परिजनों ने पीएमसीएच में उसे भर्ती कराया, तो न उसका इलाज शुरू किया गया और न ही उसे एडमिट करने के लिए बेड मुहैया कराया गया। मीडिया रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर सोमवार को पीएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड के बेड नंबर 16 पर उसे जगह दी गई, जहां सीनियर डॉक्टरों की देखरेख में इलाज चल रहा है।