मुजफ्फरनगर के प्रत्याशियों के फाइल फोटो।
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आज सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हो गयी है। उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा के लिए मतगणना जारी है। अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि आज कौन किसे मात देकर जीत हासिल करता है। वैसे शहर की ज्यादतर सीटों पर भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशियों में कांटे की टक्कर जारी है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की सभी छह विधानसभाओं का दिलचस्प इतिहास है। यहां हर चुनाव में ज्यादातर सीटों पर प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर होती है। वहीं इस बार भी भाजपा और गठबंधन के उम्मीदवारों में बड़ा मुकाबला होना तय है।
खतौली सीट का इतिहास
1967 में खतौली विधानसभा से सीपीआई के सरदार सिंह विधायक चुने गए थे। इसके बाद बीकेडी के टिकट पर वीरेंद्र वर्मा, 1974 में लक्ष्ण सिंह, 1980 में कांग्रेस इदिरा से धर्मवीर सिंह, 1985 में लोकदल से हरेंद्र सिंह, 1989 में जनता दल से धर्मवीर बालियान, 1991 व 1993 मेें भाजपा के टिकट पर सुधीर बालियान, बीकेडी के टिकट 1996 और रालोद के टिकट पर 2002 में राजपाल बालियान, 2007 में बसपा के योगराज सिंह और 2012 में रालोद के करतार भड़ाना और 2012 में भाजपा के विक्रम सैनी विधायक चुने गए थे।
कुल मतदाता--312662
पुरुष--166989
महिला--145659
अन्य--14
मुजफ्फरनगर सीट का इतिहास
सदर सीट पर मुख्य रूप से भाजपा और सपा के बीच टक्कर रही है। वर्तमान में कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल यहां से विधायक हैं। कांग्रेस की चारु शीला 1985 में यहां से विधायक चुनी गई थी, इसके बाद कांग्रेस सीट नहीं जीत सकी। 1989 में जनता दल से सोमांश प्रकाश, 1991 और 1993 में भाजपा के सुरेश संगल, 1996 में भाजपा की सुशीला देवी, 2002 में सपा के टिकट पर चितरंजन स्वरूप, 2007 में भाजपा के अशोक कंसल, 2012 में सपा के चितरंजन स्वरूप जीते। चितरंजन स्वरूप के निधन के बाद उपचुनाव में भाजपा के कपिल देव अग्रवाल और 2017 में भी कपिल देव अग्रवाल चुनाव जीते।
कुल मतदाता--346253
पुरुष--185295
महिला--160925
अन्य--33