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जुड़वा बेटी होने पर मां ने गुस्से में लावारिस छोड़ा, 11 घंटे बाद डॉक्टरों की फटकार के बाद पिलाया दूध

Sat, 01 Sep 2018 11:13 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, नीमच
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जुड़वा बेटियों के साथ मां
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भारत में आज भी बेटियों के होने पर परिवार में मातम पसर जाता है और मां अपनी ही औलाद को बेसहारा छोड़ने पर मजबूर हो जाती है। आप को ये बात गुजरे जमाने की सच्चाई जरूर लग रही होगी लेकिन ताजा मामले ने साबित कर दिया है कि आज भी स्थिति में सुधार की जरूरत है।मध्य प्रदेश के नीमच में पहले से 5 बेटी होने के बाद फिर जुड़वां लड़कियों को जन्म देने पर एक मां इतना टूट गई कि अपनी बच्चियों को रात भर दूध के बिना बिलखने के लिए छोड़ दिया।

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नीमच के सरकारी अस्पताल में बच्चियों को लावारिस छोड़ कर मां के चले जाने की खबर से खलबली मच गई। नवजात बच्चियों को जन्म के बाद ना तो अपनी मां की गोद नसीब हुई और ना ही मां का दूध।अरनिया चंद्रावत की निवासी भूलीबाई (30) ने दो जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। पहले से पांच बेटी और छठी बार मां बनने जा रही भूली और उसके परिवार को बेटे की चाह थी। लेकिन जैसे ही बेटी वो भी जुड़वा होने कू खबर मिली वो टूट गई अपनी किस्मत को कोसती हुई गुस्से में बेटियों को बिना गद्दे के पलंग पर लावारिस छोड़ चली गई।

11 घंटे तक नन्ही जाने भूख से बिलखती रहीं और जोर जोर सेे रोती रहीं पर उनकी मां और पूरे परिवार का कलेजा नहीं पसीजा।बच्चियों की हालत जान डॉक्टर्स ने फॉरन अस्पताल स्टाफ को मां- बाप को ढूंढने को कहा। अस्पताल की पड़ताल के बाद दम्पत्ति डॉक्टर्स के बाद आये तो फफक पड़े और रोने लगे।भूली के पति इंदर सिंह बंजारा को पांच बेटियों के बाद बेटे की उम्मीद थी लेकिन फिर बेटी होने से पूरे परिवार का दिल टूट गया जिस वजह से मां को गुस्सा आ गया और उसने मासूम बेटियों को छोड़ दिया।  
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अस्पताल प्रशासन के मुताबिक बच्चियां रात भर दूध के बिना रोती रहीं लेकिन मां, बाप, दादी, बुआ के कानों तक आवाज नहीं पहुंची। ड्यूटी नर्सेस लगातार मां को बच्चियों को दूध पिलाने के लिए समझाती रहीं, इसके बावजूद भूलीबाई बच्चियों को अपनाने के लिए तैयार नहीं हुई। सुबह 8 बजे नर्सेस ने बीएमओ और शिशु रोग विशेषज्ञ को सूचित किया। उन्होंने महिला और ननद को फटकार लगाई तब जाकर 11 घंटे बाद सुबह 10.30 बजे बच्चियों को मां ने दूध पिलाया।

अस्पताल ने मां-बाप को समझाकर जच्चा-बच्चा दोनो को छुट्टी दे दी है। ईश्वर के आशीर्वाद से इन बच्चियों को इनके परिवार वालों ने अपना लिया लेकिन देश में ऐसी सैकड़ों बेटियां हैं जिन्हें जन्म के बाद ही ममता की छांव से महरूम कर दिया जाता है।

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