दूसरी ओर एससी एसटी एक्ट को लेकर समाज में खाई गहरा गई है। इस मुद्दे पर ग्वालियर भिंड के इलाके में आंदोलन भड़क गया था। पहले दलित नाराज हुए तो शिवराज सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निपटने के लिए अध्यादेश लाई, जिसके बाद सवर्ण नाराज हो गए। उन्हें लगा कि वोटों के लिए भाजपा सरकार उनके अधिकारों का हनन कर रही है। फिर उन्होंने भी जबरदस्त आंदोलन छेड़ा।
जातीय संघर्षों में सात लोग मारे गए, जिनमें छह दलित थे। सवर्णों ने यहां अपनी पार्टी ‘स्पाक्स’ बना ली है और वे चुनाव लड़ रहे हैं। माना जा रहा है दलितों की नाराजगी और सवर्णों की बेरुखी भाजपा को भारी पड़ सकती है। इसके बावजूद यदि भाजपा जीतती है तो इसका श्रेय उसके बेहतर संगठन, मोदी और शिवराज की लोकप्रियता और कांग्रेस के कमजोर संगठन को जाएगा।