कार्य बहिष्कार से जुड़े एक मामले में झाखंड हाई कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल द्वारा सात वकीलों के संबंध में जारी नोटिस पर रोक लगाई है। स्टेट बार काउंसिल के इस पत्र के आधार पर राज्य बार काउंसिल के खिलाफ गुरुवार को अवमानना याचिका दायर की गई है। इस मामले में हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि मामले को आगे की कार्यवाही के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार सिन्हा ने न्यायमूर्ति आनंद सेन की पीठ के समक्ष अवमानना याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश का हवाला भी दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 'बार काउंसिल हड़ताल नहीं कर सकती है और यह अवैध है'। झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष को नोटिस भी जारी किया।
दरअसल, कोर्ट फीस में बढ़ोतरी के विरोध में झारखंड बार काउंसिल छह जनवरी से हड़ताल पर है। बुधवार को कौंसिल ने एलान किया था कि कोर्ट फीस के विरोध में जारी आंदोलन 13 जनवरी तक जारी रहेगा। राज्य सरकार द्वारा 2022 में विधानसभा में कोर्ट फीस संशोधन विधेयक पारित किया गया था। इस विधेयक के पारित होने के बाद कोर्ट फीस में वृद्धि की गई थी। झारखंड हाई कोर्ट ने कोर्ट फीस में हुई बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की है।
इस बीच, बार काउंसिल ने गुरुवार को झारखंड हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के सचिव को नोटिस जारी कर सात अधिवक्ताओं के हाई कोर्ट में पेश होने की पुष्टि करने को कहा है। इसके साथ ही नोटिस में कहा गया है कि बार काउंसिल उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रहा है।
ये वकील हैं शामिल
बार काउंसिल ने जिन सात अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दी है। उनमें अतिरिक्त महाधिवक्ता आशुतोष आनंद, राज्य के पूर्व महाधिवक्ता अनिल कुमार सिन्हा के अलावा नीलेश कुमार, मनोज कुमार मिश्रा, एनके गंझू, जितेंद्र कुमार पांडेय और शैलेंद्र कुमार तिवारी शामिल हैं।