हेमंत सोरेन ने बुधवार को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया। जिसके बाद देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। एजेंसी ने उनसे दिन में सात घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की थी। एजेंसी ने पिछले साल अप्रैल में राज्य सरकार के कर्मचारी और राजस्व विभाग के उप-निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की थी।
आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, भानु प्रताप के ठिकानों से सत्रह सरकारी दस्तावेजों को जब्त किया था। इन्हें 11 अलग-अलग बक्सों में रखा गया था। प्रसाद के कब्जे से जमीन के रिकॉर्ड के कई असली रजिस्टर जब्त किए थे। इन रजिस्टरों में जमीन पर राज्य के मालिकाना हक का विवरण था।
ईडी ने यह जानकारी झारखंड सरकार के साथ साझा की थी। जिसके बाद एक जून 2023 को रांची के सदर पुलिस थाने में भानु प्रसाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने 26 जून को अपनी ईसीआईआर दर्ज करने के लिए इस प्राथमिकी का संज्ञान लिया। ईडी ने दावा किया कि भानु प्रताप अवैध तरीके से विभिन्न संपत्तियों को हासिल करने और छिपाने के लिए अन्य व्यक्तियों के साथ साजिश रचने में सक्रिय रूप से शामिल थे। इनमें हेमंत सोरेन के कब्जे वाली संपत्तियां भी शामिल थीं।
बयान में कहा गया कि भानु प्रताप के मोबाइल फोन से भी विवरण मिले थे। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, सोरेन को ईडी ने बुधवार रात दस बजे राजभवन से गिरफ्तार किया गया। एजेंसी ने हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की वजहों को स्पष्ट किया। ईडी ने कहा कि उसने धनशोधन रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत कई लोगों के बयान दर्ज किए हैं और यह साबित हो गया है कि 12 भू संपत्तियां सोरेन के अवैध कब्जे, कब्जे और उनके उपयोग में हैं। ईडी ने कहा, इन भूखंडों का एक सर्वेक्षण किया गया था। जिससे पता चला कि ये भूखंड सोरेन के अवैध कब्जे, कब्जे या उपयोग में हैं।