जांच के बाद एनआईए के पास और कुछ सबूत पहुंचे और इनके आधार पर हाईकोर्ट से अपील की गई कि आरोपी की जमानत को रद्द किया जाए। आरोपी ने दलील दी कि उसने जमानत की कोई शर्त नहीं तोड़ी है और वह जांच में भी शामिल हो चुका है। ऐसे में उसकी जमानत रद्द नहीं की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मौजूदा मामले में सीमा पार से नार्को-आतंकवाद के गंभीर आरोप हैं, जिसमें 500 किलोग्राम हेरोइन की भारी बरामदगी शामिल है। ड्रग सिंडिकेट का पता लगाने और उसका भंडाफोड़ करने के लिए गहन और प्रभावी जांच की आवश्यकता है, जो आरोपी से हिरासत में पूछताछ के बिना संभव नहीं होगा।
यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि नशीली दवाओं का खतरा दीमक की तरह फैल गया है और धीरे-धीरे अपना जाल फैला रहा है। इससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए इन दवाओं और नशीले पदार्थों के स्रोत को लक्षित करके आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना जरूरी है। ऐसे में यह पता लगाने के लिए कि पंजाब में नशे का सिंडिकेट कौन चला रहा है, यह जानने के लिए हिरासत में पूछताछ बेहद जरूरी है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत को रद्द कर दिया है।