बेड्स की क्षमता
दिल्ली सरकार ने तीसरी लहर का अध्ययन करने के लिए उच्चाधिकारियों की एक टास्क फ़ोर्स का गठन किया है। इस फ़ोर्स में विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों के विशेषज्ञों के आलावा स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हैं। यह कमेटी सरकार को तीसरी लहर की तीव्रता और इसके संभावित असर पर रिपोर्ट देगी।
बाल चिकित्सकों की उपलब्धता
अनुमान लगाया जा रहा है कि तीसरी लहर का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ सकता है। इस दौरान बाल चिकित्सकों की पर्याप्त संख्या होना एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। दिल्ली सरकार वर्तमान शिशु रोग विशेषज्ञों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों का सहयोग लेने पर विचार कर रही है। इसके लिए एमबीबीएस छात्रों और सहयोगी सेवाओं में लगे स्वास्थ्य अधिकारियों का सहयोग भी लिए जाने की तैयारी की जा रही है।
सभी अस्पतालों में हो ऑक्सीजन
दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि तीसरी लहर के आने से पहले सभी अस्पतालों में उनकी उपयोग भर की ऑक्सीजन पैदा करने के प्लांट्स लगा दिए जाने चाहिए। अभी दिल्ली के एम्स, आरएमएल, धर्मशिला और कुछ अन्य अस्पतालों के पास ही ऑक्सीजन प्लांट्स लग पाए हैं। अगर तीसरी लहर के अक्तूबर-नवंबर महीने में आने का अनुमान लगाया जाता है, तो इसकी तैयारी के लिए ज्यादा समय शेष नहीं है। तब तक सभी अस्पतालों को इस चुनौती के तैयार होना आवश्यक है।
दिल्ली सरकार ने विशेष तकनीक विकसित कर सभी कोरोना मरीजों पर लगातार निगरानी रखने का प्रयास किया है। इससे सभी मरीजों की जान बचाने में मदद मिली है। सरकार की योजना है कि अगर तीसरी लहर में भी लोगों की संख्या इसी तरह बढ़ती है तो एक-एक मरीजों की ट्रेकिंग की पूरी व्यवस्था हो। जिससे उनकी स्थिति बिगड़ने पर उन्हें तुरंत उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
भाजपा ने लगाया गंभीर आरोप
दिल्ली भाजपा ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार कोरोना की टेस्टिंग में कमी कर कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या कम दिखा रही है। भाजपा का आरोप है कि केवल टेस्टिंग में ही नहीं, अस्पतालों में मरीजों के दाखिले तक में लापरवाही बरती जा रही है जिसके कारण मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने कहा कि दिल्ली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। पहली लहर के दौरान भी वह कोरोना मरीजों की संख्या पर कोई लगाम नहीं लगा पाई थी। जब केंद्र सरकार के सहयोग से भारी संख्या में बेड्स उपलब्ध कराए गये तब जाकर दिल्ली में कोरोना की स्थिति में सुधार आया था।
उन्होंने आरोप लगाया है कि इस बार भी दिल्ली सरकार अपने मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में असफल रही है। केंद्र सरकार ने दिल्ली में आठ ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने के पैसे दिए थे, लेकिन दुर्भाग्य है कि आज तक वे प्लांट्स नहीं लग पाए हैं। दिल्ली सरकार की इस अक्षमता का नुकसान आम दिल्लीवासियों को उठाना पड़ा है।