यूपी में मुरादाबाद में इकलौती बहन ने बारहवीं की परीक्षा अच्छे मार्क्स के साथ पास की तो तारीफ से दुखी अनपढ़ भाई ने आत्महत्या कर ली। भाई भी बहन की तरह पढ़कर कुछ बनना चाहता था। लेकिन घर की आर्थिक तंगी के कारण मां-बाप दोनों भाई-बहन को पढ़ा नहीं पाए।
माथे पर लगे अनपढ़ होने के कलंक ने युवक को झकझोर दिया। जिससे क्षुब्ध होकर उसने सोमवार की रात जहर खाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया।
मूलरूप से ठाकुरद्वारा के तुमड़िया गांव निवासी राम हरि वर्मा अपने परिवार के साथ कटघर के इंदिरा कालोनी में किराये पर रहते हैं। राम हरि वर्मा पीतल फर्म में नौकरी करते हैं। जबकि उनका बेटा शिवम वर्मा कटरा नाज में परचून की दुकान पर नौकरी करता था।
रामहरि वर्मा ने बताया कि रोज की तरह शिवम सोमवार की रात करीब नौ बजे दुकान से घर लौटा। घर आते ही वह बाथरूम में चला गया। काफी देर के बाद भी वह बाथरूम से बाहर नहीं निकला तो इसी मकान में रहने वाले दूसरे किरायेदार अनिरुद्ध ने बाथरूम का दरवाजा खोलकर देखा तो शिवम उल्टियां कर रहा था। अनिरुद्ध के शोर मचाने पर शिवम के पिता राम हरि वर्मा, उसकी मां रेखा, बहन और छोटा भाई आ गए।
उन्होंने शिवम को बाथरूम से बाहर निकाला। इसके बाद उससे पूछताछ की तो उसने जहर खाने की बात कही। परिजन शिवम को लेकर विवेकानंद अस्पताल पहुंच गए। यहां इलाज के दौरान शिवम ने दम तोड़ दिया। राम हरि ने बताया कि शिवम ने पढ़ाई नहीं की थी। वह बचपन से ही नौकरी कर रहा था।
पंद्रह मई को उसकी बहन नीतू इंटरमीडिएट में पास हुई थी। तब से वह बार बार कह रहा था कि अगर उसे भी पढ़ा लिया होता तो वह इंटर में पास हो जाता। उसने कहा कि इस जिंदगी क्या करना। दूसरे की नौकरी करते ही निकल जाएगी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद पजिनों को सौंप दिया।
गरीबी के कारण बेटे को नहीं पढ़ाया था
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शिवम के पिता ने बताया कि उसका अपना मकान तक नहीं है। वर्षों से पह किराये के मकान में रहकर गुजर बसर कर रहा था। दो बेटे और एक बेटी है। तीनों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा था। इसलिए मैंने दोनों बेटों को पढ़ाई से रोक दिया और बेटी की पढ़ाई जारी रखी है। मुझे क्या पता था। मेरी ये गलती मेरे बेटे की जान ले लेगी। बेटे को पढ़ाई से रोका न होता तो शायद आज वह हमारे बीच होता।
मामले पर मनोरोग विशेषज्ञ डा. नीरज गुप्ता ने कहा, ‘यह एक रिवर्स केस है। ऐसे केस कम ही आते हैं। क्योंकि आम तौर पर लड़कियों की तुलना में अभिभावक लड़कों की पढ़ाई पर अधिक जोर देते हैं। बच्चा परिवार में अपनी उपेक्षा से आहत होता है। जबकि दूसरी ओर उसके भाई या बहन को बेहतर रिजल्ट पर लगातार शाबाशी मिलती है। अपनी उपेक्षा और भाई-बहन की तरक्की से ऐसे बच्चे अवसाद में चले जाते हैं। पूरी तरह से फ्रस्टेट हो जाते हैं। उनकी सोचने समझने की क्षमता कम होने लगती है। आखिर में आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं।’ - ,
पढ़कर कुछ बनना चाहता था शिवम
जहर खाकर आत्महत्या करने वाले शिवम ने कक्षा पांच तक पढ़ाई की थी। इसके बाद उसके पिता ने उसे पढ़ाई से रोक लिया था। इसके बाद उसे परचून की दुकान पर लगा दिया था। लेकिन शिवम पढ़कर कुछ बनना चाहता था। बचपन में उसने अपने पिता से कई बार कहा था कि वह पढ़ना चाहता है। लेकिन पिता की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण शिवम की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी।