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ठाणे फिरौती मामले में पुलिस तलाश रही डी कंपनी कनेक्शन

Wed, 20 Sep 2017 12:56 AM IST
एजेंसी
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इकबाल कासकर
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बिल्डर से फिरौती वसूली में इकबाल कासकर और उसके गुर्गों की गिफ्तारी के बाद पुलिस यह पता करने में लगी है कि क्या यह सब दाऊद इब्राहिम के इशारे पर हो रहा था। दाऊद के भाई कासकर के रैकेट से एनसीपी नेताओं की साठगांठ का भी पता लगाया जा रहा है। एक नामी बिल्डर की शिकायत पर कासकर और उनके गुर्गों को गिरफ्तार किया गया है। 
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कासकर को तीन अन्य लोगों के साथ फिरौती वसूलने के आरोप में सोमवार शाम को गिरफ्तार किया गया था। कासकर को उसकी बहन हसीना पारकर के सेंट्रल मुंबई के नागपाड़ा स्थितघर से हिरासत में लिया गया। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और फिरौती रोधी सेल के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा की अगुवाई में एक टीम ने उसे हिरासत में लिया था।

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ठाणे के पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह के मुताबिक फिरौती को लेकर दो लोगों से पूछताछ के दौरान कासकर का भी नाम आया। फिरौती रैकेट में कुछ बिल्डर और नेताओं के भी नाम आए। इनमें कुछ एनसीपी के पार्षद भी हैं। 
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नामी बिल्डर से वसूल चुके थे 30 लाख और पांच करोड़ के फ्लैट 

फाइल - फोटो : सांकेतिक चित्र
पुलिस का कहना है कि जिस दौरान कासकर को गिरफ्तार किया गया उस दौरान उसके साथ इकबाल पारकर, ड्रग डीलर मोहम्मद हुसैन ख्वाजा शेख और फर्नांडो थे। पुलिस इन लोगों को पूछताछ के लिए अपने साथ ले आई। 

कासकर के गुर्गे ठाणे के एक नामी बिल्डर को 2013 से ही दाऊद के नाम पर धमकी दे रहे थे और अब तक उससे 30 लाख रुपये और लगभग पांच करोड़ रुपये के चार फ्लैट ले चुके हैं। शिकायतकर्ता से 2014 से ही वसूली चल रही थी। उससे फिरौती के तौर पर जो चार फ्लैट लिए  गए थे उनमें से एक रोजा वैली बिल्डिंग में था। गिरफ्तार लोगों में से एक उसमें रहता भी था। 

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कुछ दिनों पहले इस बिल्डर ने ठाणे के कसरवाडावली पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 384 (फिरौती वसूली) , 386 (हत्या या गंभीर रूप से चोट पहुंचाने की धमकी देकर फिरौती वसूली) और 387 के तहत शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद इस मामले को ठाणे पुलिस के फिरौती रोधी सेल को सौंप दिया गया था।

2003 में यूएई से लाया गया था कासकर  
कासकर को 2003 में संयुक्त अरब अमीरात से लाया गया था। कहा जाता है कि वह वहां दाऊद इब्राहिम का रियल एस्टेट बिजनेस देखता था। पुलिस को एक हत्याकांड और सारा सहारा अवैध निर्माण के मामले में उसकी तलाश थी। हालांकि कासकर को 2007 में छोड़ दिया गया था। 
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