चेन्नई पुलिस ने पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे 50 से ज्यादा लेखक, साहित्यकार समेत शिक्षाविदों को गिरफ्तार किया। मरीना बीच पर मौजूद अलग-अलग आयु वर्ग के 100 से ज्यादा आंदोलनकारी हाथों में तख्तियां लिए मौजूद थे।
अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की जयंती के दिन हुए इस कार्यक्रम में आंदोलनकारियों ने सीधे तौर पर संघ पर निशाना साधते हुए कहा कि,'जो संस्था बापू की हत्या का जिम्मेदार है उसी ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की एक प्रहरी गौरी लंकेश की हत्या की'।
पुलिस ने की गिरफ्तारी
घटनास्थल
हाथों में तख्तियां लिए और नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज करा रहे बुद्धिजीवियों का ये समूह नारेबाजी करते हुए गांधी जी की प्रतिमा तक जा रहा था, लेकिन पुलिस ने पहले तो नारेबाजी बंद करने कहा फिर शांतिपूर्वक आगे की ओर बढ़ते हुए इस समूह को पुलिस ने जबरदस्ती गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आंदोलनकारियों को वसुकी वेल्लूर मंडपम में रखा था, जिसके बाद उसी शाम सभी को रिहा कर दिया गया। देशभर के 13 शहरों से इस विरोध प्रदर्शन के लिए चेन्नई में इकट्ठा हुए ये लोग एक सोशल मीडिया मुहिम से भी जुड़े हुए हैं जो पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या का लगातार विरोध कर रही है।
कौन थी पत्रकार गौरी लंकेश?
gauri lankesh
वरिष्ठ पत्रकार और नक्सलियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाली गौरी लंकेश की बेंगलुरु में उनके घर पर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 1962 में जन्मी गौरी ने पत्रकारिता की शुरुआत बेंगलुरु में एक अंग्रेजी अखबार से की थी। यहां कुछ समय काम करने के बाद वो दिल्ली चली गईं थी।
दिल्ली में भी कुछ साल काम करने के बाद वो दोबारा बेंगलुरु लौट आईं और यहां 9 साल तक संडे नाम की मैग्जीन में काम किया। पत्रकार होने के साथ गौरी एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थीं। गौरी के पिता पी लंकेश कन्नड़ में 'पत्रिका' नाम से एक साप्ताहिक पत्रिका निकालते थे। साल 2005 में नक्सलियों से जुड़ी एक खबर के चलते गौरी विवादों में रही थी।