बिहार विधानसभा की कार्यवाही के दौरान शनिवार को खासी गहमागहमी रही। राजद ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार द्वारा नरेंद्र मोदी को झुककर प्रणाम करने से बिहार शर्मसार हुआ। वहीं, विधायक फंड को लेकर कांग्रेस विधायक अजित शर्मा और मंत्री विजेंद्र यादव के बीच तू-तू, मैं मैं हो गई। विधायक महाबली सिंह यादव ने पूछा कि एमएलए फंड बढ़ाने को लेकर क्या कुछ हुआ, ये साफ किया जाए। मंत्री विजेंद्र यादव ने बताया कि फिलहाल तीन करोड़ से ज्यादा का फंड बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है।
राजद प्रवक्ता का नीतीश पर निशाना
राजद प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने कहा है कि नीतीश कुमार महान मुख्यमंत्री हैं। वह अपनी कुर्सी बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झुककर प्रणाम करने पर उन्होंने नीतीश कुमार को आड़े हाथों लिया। पार्टी ने कहा कि नीतीश कुमार नरेंद्र मोदी के सामने स्त्रियों के जैसे साष्टांग हो गए हैं। यह वही नीतीश कुमार हैं, जिन्होंने कहा था कि मिट्टी में मिल जाएंगे लेकिन भाजपा के साथ नहीं जाएंगे, भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। भाई वीरेंद्र ने कहा है कि नीतीश कुमार की वजह से एक बार फिर बिहार शर्मसार हुआ है।
जदयू का पलटवार
वहीं, जदयू के विधान परिषद सदस्य गुलाम रसूल बलियावी ने पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तर प्रदेश के शपथ ग्रहण समारोह में मंच पर मुलाकात में जो हुआ वह हमारे समाज और संस्कृति की देन है। हमारे मुख्यमंत्री ने इस तरह का परिचय दिया है। अगर विपक्ष को इसमें भी कोई राजनीति लगती है तो उनके दिमाग पर हमें तरस आता है।
विधायक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखें
बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के रचनात्मक उपयोग के साथ भारत की एक नई छवि बनानी चाहिए। बिहार विधानसभा में निर्वाचित प्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों पर एक बहस का समापन करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें संविधान में निर्धारित कर्तव्यों को पूरा करके लोगों के लिए रोल मॉडल के रूप में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधायकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए क्योंकि दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। अध्यक्ष ने कहा कि यदि देश के निर्वाचित प्रतिनिधि और नागरिक संविधान में निहित अपने मौलिक कर्तव्यों का निर्वहन करें तो एक नए भारत का निर्माण होगा।